सत्ता की विश्वसनीयता हमेशा संदिग्ध होती है। इसलिए वह हर विरोधी आवाज़ को अविश्सनीय बनाने में जुटी रहती है। उसकी कोशिश रहती है कि हर व्यक्ति, हर संस्था को अविश्वसनीय बना दो ताकि लोग इसे आम मानकर हताश हो जाएं।और भीऔर भी