यहां सब कुछ बदलता है हर पल। घूमता है, चलता नहीं। एक चक्र है जिसमें चीजें जहां से चली थीं, घूम-फिरकर वहीं कहीं आसपास आ जाती हैं। हां, समय चलता है निरंतर! लेकिन समय तो एक टेक्नोलॉजी है जिसे प्रकृति ने नहीं, हमने ईजाद किया है।और भीऔर भी

वही खाना, वही सोना, वही जागना, वही नहाना, वही धोना। यह क्रम है जिसे हर दिन निभाना रहता है। घर की सफाई हर दिन करनी पड़ती है। इसी तरह ज्ञान के लिए एक दिन नहीं, हर दिन पढ़ना पड़ता है।और भीऔर भी

यहां हर चीज का अपना स्वतंत्र चक्र है। तन का भी और उससे जुड़े मन का भी। खुद को दूसरे के हवाले करते ही चक्र उसकी शर्तों पर ढल जाता है। पर मुक्ति अपने चक्र के अपनी शर्तों पर चलने से मिलती है।और भीऔर भी

इस समूची सृष्टि में हर सीधी रेखा किसी न किसी बड़े वक्र का हिस्सा होती है। अगर लगता है कि कोई चीज सीधी रेखा में चल रही है तो वो अल्पकालिक सच है। दीर्घकाल में हर चीज चक्र में ही चलती है।और भीऔर भी

सूरज यह सोचकर नहीं निकलता कि कमल को खिलाना है। चांद इसलिए नहीं उगता कि कुमुदिनी को हंसाना है। बादल भी बरसात के लिए नहीं बनते। यह तो चक्र है जो भीतर ही भीतर चलता है, बाहर नहीं।और भीऔर भी

समय तो यंत्रवत चलता है। हमने ही उसे नैनो सेकंड से लेकर साल तक के पैमाने में कसा है। अपने जीवन को हम जन्मदिन के चक्र में कसते हैं। लेकिन यह हमारा अपना चक्र है। समय से हमारी कोई होड़ नहीं।और भीऔर भी