समय तो यंत्रवत चलता है। हमने ही उसे नैनो सेकंड से लेकर साल तक के पैमाने में कसा है। अपने जीवन को हम जन्मदिन के चक्र में कसते हैं। लेकिन यह हमारा अपना चक्र है। समय से हमारी कोई होड़ नहीं।और भीऔर भी

भगवान ने इंसान को बनाया या इंसान ने भगवान को – यह बात मैं दावे के साथ नहीं कह सकता। लेकिन इतना दावे के साथ जरूर कह सकता हूं कि दस के चक्र/क्रम में चलनेवाली गिनतियों को इंसान ने ही बनाया है। इंसान की दस उंगलियां है तो यह चक्र दस का है। उन्नीस होतीं तो यह चक्र उन्नीस का होता। ज्योतिष और अंकों में दिलचस्पी रखनेवाले इस पर सोचें। हम तो फिलहाल यह देखते हैं किऔरऔर भी

निरंतर नए ऑरबिट में जाने की कोशिश करना इंसान का मूल स्वभाव है। इसलिए हम रूटीन से ऊब जाते हैं। लेकिन नए ऑरबिट में जाकर भी नए चक्र में बंधना पड़ता है। चक्र के इस चक्कर से मुक्ति नहीं।और भीऔर भी

समय का अपना चक्र होता है। जो इसे पकड़ नहीं पाते, इसके हिसाब से चल नहीं पाते, वे जीवन की बहुत सारी खुशियों से महरूम रह जाते हैं। देर से सोकर उठनेवाले कभी भी सूर्योदय का आनंद नहीं उठा पाते।और भीऔर भी