मंत्र या टिप्स के चक्कर में पड़े लोग खुद मेहनत नहीं करना चाहते। आंख, कान व बुद्धि का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। अन्यथा, आज तो हमारा सारा बाज़ार डिटिजल हो चुका है। एकदम पारदर्शी। जो हो रहा है, सब आंखों के सामने। बल्क व ब्लॉक-डील से लेकर देशी व विदेशी संस्थाओं तक की खरीद-फिरोख्त का सारा डेटा अगले दिन की ट्रेडिंग से पहले आपकी स्क्रीन पर होता है, बस दो-चार क्लिक के बाद। अब मंगलवार की दृष्टि..औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग उन्हीं लोगों को करनी चाहिए, जिनके पास अपनी सारी तात्कालिक और आकस्मिक ज़रूरतों का इंतज़ाम कर लेने के बाद भी इफरात धन बचता है। लेकिन यहां केवल वही लोग नहीं जाते जिनके पास इफरात धन है, बल्कि ज्यादातर ऐसे लोग आते हैं जो अपने सीमित धन को इफरात बनाना चाहते हैं। वे हमेशा किसी मंत्र या टिप्स के चक्कर में पड़े रहते हैं जो उन्हें रातोंरात धनवान बना दे। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

रिजर्व बैंक को जीडीपी के 9.5% घटने का अंदेशा है। लेकिन मोदी सरकार बेधड़क कहती है कि उसने अर्थव्यवस्था व अवाम के कल्याण के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं। हर महीने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन। 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज। वह टीसीएस और एचडीएफसी के अच्छे नतीजों को भी अपनी उपलब्धि बताती है। देश अगर वाकई शिक्षित होता तो सरकार इतनी हवाबाज़ी नहीं कर पाती। आज तथास्तु में शिक्षा व्यवसाय से जुड़ी एक कंपनी…औरऔर भी

छह साल से मोदी सरकार का एक सूत्रीय कार्यक्रम रहा है ज्यादा से ज्यादा टैक्स जुटाना। नोटबंदी से लेकर बिना तैयारी के जीएसटी लागू करने के पीछे मूल मकसद यही रहा है। घोटाले और बैंक फ्रॉड रुक जाएं, यह उसकी प्राथमिकता नहीं है। लेकिन मध्यवर्ग व व्यापारी तबके से वह टैक्स वसूलने का कोई मौका नहीं चूकती। कोरोना संकटकाल में भी प्रीमियम से लेकर डीमैट खातों तक पर उसकी वक्री-दृष्टि लगी हुई है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

बैंकों व वित्तीय संस्थाओं को किसी भी संदिग्ध सौदे की रिपोर्ट सात दिन में एफआईयू को देनी होती है। ब्रोकरों ने ऐसी बेहद कम रिपोर्ट दाखिल की हैं, जबकि पिछले छह महीने में औसतन प्रतिमाह 7.6 लाख नए निवेशक शेयर बाज़ार में उतरे हैं। इसलिए वित्त मंत्रालय को अंदेशा है कि ब्रोकर अपने ग्राहकों के सौदे छिपा रहे हैं। दरअसल, संदिग्ध सौदों की रिपोर्ट मिलने पर ही मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट लगाकर जांच होती है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के तहत काम कर रही वित्तीय खुफिया इकाई के अधिकारियों ने वीडियो लिंक के ज़रिए अगस्त में 20 से ज्यादा प्रमुख शेयर ब्रोकिंग फर्मों से पूछताछ की है। पूछा गया कि संदिग्ध सौदों की रिपोर्ट (एसटीआर) जमा करने में उन्होंने ढिलाई व कोताही क्यों बरती है। चार खास ब्रोकिंग फर्मों – जेरोधा, रिलायंस सिक्यू., आरकेएसवी सिक्यू. व मोतीलाल ओसवाल के साथ आगे फिर से बैठक की जानी है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

दिन के उजाले की तरह साफ है कि पिछले छह महीनों में शेयर बाज़ार देशी निवेशक संस्थाओं की ज्यादा खरीद के दम पर बढ़ा है। इसमें थोड़ा योगदान एफआईआई का भी है। लेकिन सरकार किसी सार्थक काम में लगने के बजाय देश का ध्यान भटकाने के लिए इसके पीछे काले धन का अंदेशा जता रही है। वित्त मंत्रालय से संबद्ध फाइनेंशियल इंटिलिजेंस यूनिट (एफआईयू) ने ब्रोकरों से संदिग्ध सौदों की रिपोर्ट मांगी है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

इस साल मार्च से अब तक विदेशी निवेशक संस्थाओं ने शेयर बाज़ार में शुद्ध रूप से 14,139 करोड़ रुपए डाले हैं, जबकि इसी दौरान घरेलू निवेशक संस्थाओं का शुद्ध निवेश 49,261 करोड़ रुपए रहा है। दोनों का शुद्ध निवेश मिलाकर 63,400 करोड़ रुपए। वहीं, सेंसेक्स और निफ्टी 23 मार्च को तलहटी पकड़ने के बाद से क्रमशः 48.94% और 50.02% बढ़ चुके हैं। सरकार परेशान है कि किसका धन आने से बाज़ार बढ़ा है! अब सोम का व्योम…औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था कब वापस पटरी पर आएगी, नहीं बताया जा सकता। लेकिन कुछ सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। वाहनों की बिक्री, एयर ट्रैफिक, टोल संग्रह और रेलवे से माल लोडिंग बढ़ने लगी है। मानसून औसत से बेहतर रहा है तो खरीफ की फसल अच्छी रहेगी। वैसे भी कोरोना संकट में हमारी अर्थव्य़वस्था बढ़ने के बजाय जब 23.9% सिकुड़ गई, तब कृषि की विकास दर 3.4% रही है। आज तथास्तु में कृषि बिजनेस से जुड़ी एक कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार कभी सीधी रेखा में नहीं चलता। उठना-गिरना उसका स्वभाव है। खरीदने का पलड़ा भारी तो बढ़ता है, अन्यथा गिरता है। इधर एफआईआई/एफपीआई बराबर बेच रहे हैं। मगर बाज़ार ज्यादा गिर नहीं रहा। बढ़ रहा या सपाट बंद हो रहा है। समझना ज़रूरी है कि इस समय किसकी खरीद से बाज़ार संभला हुआ है? अभी वे खरीद रहे हैं जिन्होंने पहले बेच रखा है और शॉर्ट कवरिंग से मुनाफा कमा रहे हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी