किताबों में अच्छी बातें पढ़ते हैं। ज्ञान की अच्छी बातें सुनते हैं। लेकिन चंद दिनों में वे उड़ जाती हैं। इसलिए क्योंकि दिमाग तो काम की जरूरी बातें ही सजोकर रखता है। इसलिए पहले जरूरत बढ़ाओ बंधुवर!और भीऔर भी

किताबी ज्ञान पिछली पीढ़ियों के अनुभवों का निचोड़ है। लेकिन वह तब तक किसी काम का नहीं, जब तक उसे आज के संदर्भ में पचा न लिया जाए। नहीं तो वह व्यक्ति को वायु के रोगी की तरह असहज बना देता है।और भीऔर भी

यूं तो किसी भी आदत तो जड़ से मिटा देना ही अच्छा। लेकिन न मिटे तो उसे मोड़ देना चाहिए। जैसे, हम आदतन भिखारी को पैसा देते हैं। ये एक-दो रुपए हमें नई किताब खरीदने के लिए ज्ञान-पात्र में डाल देने चाहिए।और भीऔर भी