प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इस बार लाल किले की प्राचीर से सारे देशवासियों की तरफ से संकल्प किया है कि साल 2022 तक नया भारत बना लेंगे। उन्होंने कहा कि पांच साल बाद का ‘भव्य हिन्दुस्तान’ आतंकवाद, सम्प्रदायवाद व जातिवाद से मुक्त होगा। तब भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद से कोई समझौता नहीं होगा। वह स्वच्छ होगा, स्वस्थ होगा और स्वराज के सपने को पूरा करेगा। गरीबों के पास बिजली व पानी से साथ पक्का घर होगा। किसान अभीऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ को मंजूरी दे दी। यह योजना इसी साल खरीफ सीजन से लागू हो जाएगी। इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, “यह एक ऐतिहासिक दिन है। मेरा विश्वास है कि किसानों के कल्याण से प्रेरित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन लाएगी।” सरकार की तरफ से जारी सूचना में कहा गया है कि किसानों केऔरऔर भी

मशहूर विश्लेषक मार्क फेबर का मानना है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय साल 2008 से भी बदतर अवस्था में है। जबरन कम रखी ब्याज दरों का विस्तार अमेरिका से लेकर यूरोप तक हो चुका है। हर महीने 85 अरब डॉलर के नोट झोंकने के बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था संतोषजनक स्थिति में नहीं आ पाई है। भारत व चीन जैसे उभरते देश भी सुस्त पड़ते दिख रहे हैं। ऐसे माहौल में ऐसी कंपनी, जिसका आधार बड़ा मजबूत है…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के मूड का पैमाना बीएसई सेंसेक्स 10 जनवरी 2008 के शिखर 21,206.77 को भेदकर 21,293.88 की नई ऊंचाई हासिल कर चुका है। एक तो महंगाई की औसत दर को 10 फीसदी भी मानें तो सेंसेक्स का असल स्तर 12,251.16 पर है। दूसरे, इसमें शामिल 30 कंपनियों से अलग बीएसई-500 पर नज़र डालें तो मात्र 133 शेयर ही नए शिखर पर हैं। बाकी 367 अब भी पस्त हैं। पेश है इन्हीं में से एक शानदार शेयर…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में लांग टर्म के निवेश का फलना कोई जादू नहीं। अर्थव्यवस्था के साथ बढ़ता है निवेश। अर्थव्यवस्था पस्त हो तो निवेश खोखला हो जाता है। जैसे, जापानी अर्थव्यवस्था पिछले बीस सालों से पस्त है तो जो निक्केई सूचकांक दिसंबर 1989 में 38,915 पर था, 23 साल चार माह बाद अभी 13,694 पर है। भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ने की अपार संभावना है तो यहां लंबे निवेश के फलने की गारंटी है। एक ऐसी ही संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

नए साल के बजट में तमाम टैक्सों में घटबढ़ हो सकती है। टैक्स का आधार बढ़ाने की कोशिश भी हो सकती है। लेकिन एक बात तय है कि वित्त मंत्री पलनियप्पन चिदंबरम किसानों या कृषि आय पर कोई टैक्स नहीं लगाएंगे। वैसे, बीजेपी की तरफ से अगर यशवंत सिन्हा वित्त मंत्री बने होते तो वे भी यह जोखिम नहीं उठाते। फिर भी टैक्स आधार बढ़ाने की बड़ी-बड़ी बातों से कोई भी वित्त मंत्री बाज़ नहीं आता। दिक्कतऔरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था (जीडीपी) में कृषि, वानिकी व मत्स्य-पालन का योगदान घटकर 14% से नीचे आ गया है। मैन्यूफैक्चरिंग व खनन का सम्मिलित हिस्सा 17% के आसपास है। बाकी करीब-करीब 69% भाग सेवा क्षेत्र के हवाले है। सेवा क्षेत्र में सबसे बड़ा हिस्सा व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट व संचार का है। इसके बाद फाइनेंसिंग, बीमा, रीयल एस्टेट व बिजनेस सेवाओं का है। फिर नंबर सामुदायिक, सामाजिक व वैयक्तिक सेवाओं का है। इसके बाद कंस्ट्रक्शन और आखिर में बिजली,औरऔर भी