निफ्टी में 14.5 अंक गिरावट आई और वह अब भी 5386.15 पर है। सेंसेक्स भी केवल 47.74 अंक गिरा और वह 17,938.16 पर टिका है। लेकिन बाजार में करेक्शन का सिलसिला चल निकला है क्योंकि अधिकांश खिलाड़ी सेंसेक्स के 18,000 के ऊपर पहुंचने पर मुनाफावसूली की राह पकड़ने का फैसला कर चुके हैं। मेरिल लिंच जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ी ने तो ऑन रिकॉर्ड कह दिया है कि बाजार अभी काफी महंगा नजर आ  रहा है। इसलिए करेक्शन काऔरऔर भी

यूरोप के निवेशक जल्द ही भारतीय शेयरों पर भी दांव लगा सकेंगे। देश का सबसे पुराना शेयर बाजार बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) जर्मनी में फ्रैंकफर्ट स्थित डॉयचे बोर्स से बातचीत कर रहा है ताकि वहां बीएसई सेंसेक्स आधारित डेरिवेटिव सौदों की ट्रेडिंग शुरू की जा सके। जर्मन भाषा में बोर्स का मतलब बाजार या एक्सचेंज होता है। बीएसई के एक एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक डॉयचे बोर्स में में सेंसेक्स फ्यूचर्स और सेंसेक्स ऑप्शंस में कारोबार शुरूऔरऔर भी

मई का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) बाजार की उम्मीद से कम हैं। फिर भी बाजार में किसी करेक्शन/गिरावट का अंदेशा नहीं है। भरपूर बारिश, अच्छा कर संग्रह, खाद्यान्नों के उत्पादन में बढोतरी, ठोस राजकोषीय मजबूती, बाजार में शेयरों के मालिकाने का स्वरूप और ज्यादा से ज्यादा शेयरों की मात्रा को पचाने की क्षमता… ये सब ऐसे कारक हैं जो सेंसेक्स को 21,000 तक ले जा सकते हैं। आज यह सूचकांक 18,000 अंक के जादुई आंकड़े से ऊपरऔरऔर भी

सेंसेक्स अब 18,000 के जादुई आंकड़े से सिर्फ 170 अंक दूर है और अगर सोमवार को 9 बजे बाजार खुलने पर यह मुकाम हासिल हो जाए तो मुझे जरा-सा भी अचरज नहीं होगा। कल मेरी टीम ने जब मुझे बताया कि स्लोएन (Sloane) नाम के एक फंड ने भारती एयरटेल के 10.3 लाख शेयर खरीदे हैं, तभी मैंने उनसे कह दिया था कि भारती कल आराम कल 300 रुपए को पार कर जाएगा और पक्के तौर परऔरऔर भी

रिलायंस पावर का 3.91 फीसदी बढ़कर 182 रुपए और आरएनआरएल का 27.10 फीसदी घटकर 46.40 रुपए पर बंद होना विलय के अनुपात के हिसाब से मूल्यों का समायोजन है। ऐसा तो होना ही था। श्राडेर डंकन को भी आज बढ़ना था और उस पर ऊपरी सर्किट ब्रेकर भी लगना ही था। कारण, समाचार एजेंसी ने वह खबर चला दी थी और प्रमुख आर्थिक अखबार ने छाप दी थी जिसकी हांक हम महीने भर पहले से लगा रहेऔरऔर भी

अजीब भेड़चाल चलती है हमारे बाजार में। धारा के साथ बहना लोगों की आदत हो गई है। निफ्टी जब 4800 पर चला गया था तो एक भी शख्स ऐसा नहीं था जो कहता कि यह फिर से 5300 तक जाएगा, वह भी इसी सेटलमेंट में। लेकिन ऐसा हो गया। निफ्टी एक तरह से नए शिखर पर पहुंच गया है जबकि बीएसई सेंसेक्स 18,000 को पार करने से ज़रा-सा चूक गया। तो, अब पूरा बाजार एक ही रागऔरऔर भी

जी-20 के सम्मेलन तक में दुनिया भारत की ओर देख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति को लगा कि अब भारत के साथ रिश्ते मधुर बनाने का वक्त आ गया है क्योंकि भारत जिस रफ्तार से विकास कर रहा है, उससे वह एक दिन सारी दुनिया का चहेता बन जाएगा और विश्व अर्थव्यवस्था को मंदी से बाहर निकाल सकता है। यह भी बड़ी विचित्र बात है कि निवेशक और ट्रेडर बड़ी आसानी से चीन को किनारे कर रहे हैं।औरऔर भी

एक बार फिर यह बात साबित हो गई कि ज्यादातर ट्रेडर और निवेशक अपना दिमाग ही इस्तेमाल नहीं करते। वे बिजनेस चैनलों पर आनेवाले मुट्ठी भर एनालिस्टों की बातों पर यकीन करके गुमराह हो जाते हैं। असल में ये लोग ट्रेडरों और निवेशकों का एकदम ब्रेन-वॉश कर देते हैं। जब कंप्यूटर पर पंचिंग की एक गलती से रिलायंस को झटका लगा और बाजार (सेंसेक्स) 400 अंक गिर गया तो अधिकांश एनालिस्ट कहने लगे कि अब तो बाजारऔरऔर भी

कल मैंने लिखा कि आईएफसीआई को बेचकर मुनाफा कमा लें और आज सुबह देखा तो इसने ट्वेंटी-ट्वेंटी जैसी रफ्तार पकड़ रखी थी। असल में आईएफसीआई ऐसा भागनेवाला स्टॉक है जिसे ट्रेडर खट से पकड़ लेते हैं। कल इसके ओपन इंटरेस्ट में एक करोड़ शेयर बढ़ गए थे और मुझे अंदेशा था कि अगर बाजार नहीं गिरता तो यह 95 फीसदी की लिमिट में जा सकता था। इसीलिए मैंने मुनाफावसूली की सलाह दी थी। दरअसल, हम अपने बाजारोऔरऔर भी

मार्क मोबियस का यह कहना मेरे लिए बड़ा सुकून भरा रहा कि वे पिछले एक महीने से ब्रिक (ब्राजील, रूस, भारत व चीन) देशों में खरीदारी कर रहे हैं। मुझे तसल्ली हुई कि कम से कम मेरा एक चाहनेवाला खुल्लम-खुल्ला मान रहा है कि अनिश्चितता का दौर बाजार में खरीदारी का सबसे अच्छा वक्त होता है। निफ्टी जब 5000 या 5050 अंक पर था, तभी हमने अनुमान जताया था कि वैश्विक संकट के चलते यह 4850 तकऔरऔर भी