कितने दूर, कितने पास
किसी से इतना मत जुड़ो कि लगे कि उसके बिना जी नहीं सकते। लेकिन इतना दूर भी न रहो कि लगे कि निपट अकेले हो गए हो। दुनिया तो किसी न किसी के साथ ही कटती है। लेकिन मुक्ति अकेले में मिलती है।और भीऔर भी
किसी से इतना मत जुड़ो कि लगे कि उसके बिना जी नहीं सकते। लेकिन इतना दूर भी न रहो कि लगे कि निपट अकेले हो गए हो। दुनिया तो किसी न किसी के साथ ही कटती है। लेकिन मुक्ति अकेले में मिलती है।और भीऔर भी
भगवान एक ट्रोज़ान हॉर्स है जो प्रकृति से हमारे मानस को मिले हर सॉफ्टवेयर की स्पीड स्लो कर देता है, मन की तमाम प्रोग्राम फाइलों को करप्ट कर देता है। पूरी क्षमता पाने के लिए इस वायरस से मुक्ति जरूरी है।और भीऔर भी
जब हम व्यक्ति से लेकर समाज और अंदर से लेकर बाहर की प्रकृति के रिश्तों को तार-तार समझ लेते हैं तो हमारी अवस्था क्षीरसागर में शेषनाग की कुंडली पर लेटे विष्णु जैसी हो जाती है। हम मुक्त हो जाते हैं।और भीऔर भी
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