इस साल संसद के शीत सत्र के अंत तक सभी राज्यों में चल रही मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना) के कामकाज का ऑडिट संसद के सामने रख दिया जाएगा। यह ऑडिट भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी) की तरफ से किया जाएगा। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने सोमवार को राजधानी दिल्ली में सीएजी से मुलाकात के बाद यह घोषणा की। मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए श्री रमेश ने कहा कि अक्तूबर केऔरऔर भी

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के मुताबिक, अब समय आ गया है कि महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) पर अमल के दूसरे चरण की शुरुआत की जाए। गुरुवार को राजधानी दिल्ली में छठे मनरेगा सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए उन्‍होंने कहा कि राज्‍य सरकारों और विभिन्‍न समूहों के साथ व्‍यापक विचार-विमर्श के बाद अनेक नए विचार सामने आए और उनमें से कुछ को अगले महीने तक मनरेगा के दूसरे चरण में शामिल करऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने अपनी प्रमुख योजना राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून के तहत करोड़ों रुपए की कथित वित्तीय अनियमितता मामले में मध्य प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने राज्य सरकार को पत्र भेजा है। इसमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के तहत मजदूरी वितरण में लगाए गए कई आरोपों के बारे में जवाब मांगा है। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार के जवाब के आधार परऔरऔर भी

महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के वितरण तंत्र को दुरूस्त करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि ‘लीकेज’ को दूर करने और पारदर्शिता को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल एक बेहतर साधन हो सकता है । प्रधानमंत्री ने मनरेगा के तहत काम करने वाले सभी मजदूरों का बायोमेट्रिक डाटाबेस तैयार करने और इसका इस्तेमाल हाजिरी और मजदूरी के भुगतान जैसे कामों में किये जाने केऔरऔर भी