आम भारतीय मानसिकता संपत्ति को भौतिक रूप में देखने-महसूस करने की है। हम धन को गाड़कर रखते रहे हैं। अब भी जमीन से हमारा गहरा जुड़ाव है और हमारी आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा संपत्ति को भौतिक रूप में ही देखना चाहता है। लेकिन डीमैट के इस दौर में संपत्ति को भौतिक रूप से देखने का मनोविज्ञान नहीं चल सकता। इसे तोड़ना होगा, बदलना होगा, जिसके लिए शिक्षा जरूरी है। इससे हम नक्सली हिंसा व अशांति कोऔरऔर भी

मुझे पता है कि कुछ ट्रेडर्स इतने थक और पक गए हैं कि वे अब भारतीय इक्विटी को लेकर उतना गंभीर नहीं रहे। मैं गुजरात में करीब 10,000 निवेशकों से मिला और मुझे अहसास हुआ कि उनमें से ज्यादातर शेयर बाजार के पक्ष में नहीं है। बस ट्रेडिंग के लिए ट्रेडिंग करते हैं। यहां तक कि आज खरीदो, कल बेचो (बीटीएसटी) वाले खिलाड़ी भी थक गए हैं और लंबे समय से उन्होंने भी निफ्टी में शॉर्ट रहना,औरऔर भी

श्री शक्ति पेपर मिल्स ने दो दिन पहले ही अपने सालाना नतीजे घोषित किए हैं। 2009-10 में उसकी बिक्री पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 3.27 फीसदी बढ़कर 143.26 करोड़ रुपए हो गई है। लेकिन इसी दौरान उसका शुद्ध लाभ 39.98 फीसदी बढ़कर 4.64 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। शायद इन्हीं परिणामों के असर से सोमवार को उसका शेयर बीएसई में 5.45 फीसदी बढ़कर 22.25 रुपए पर बंद हुआ है। इस भाव पर भी इसका पी/ईऔरऔर भी

इस समय पूंजी बाजार से रिटेल निवेशक या आम निवेशक कन्नी काट चुके हैं। सेकेंडरी बाजार या शेयर बाजार में उनका निवेश लगभग सूख चुका है। दूसरी तरफ, जो प्राइमरी बाजार कुछ साल पहले तक आम निवेशकों का पसंदीदा माध्यम बना हुआ था, वहा भी अब आईपीओ (शुरुआती पब्लिक ऑफर) व एफपीओ (फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर) में लोगबाग पैसे नहीं लगा रहे हैं। लगाएं भी तो कैसे। कमोबेश हर आईपीओ या एफपीओ लिस्ट होने के बाद इश्यू मूल्यऔरऔर भी

सेरा सैनिटरीवेयर आज सुबह से ही गर्दन तानकर बढ़ रहा है। सुबह खुला तो शुक्रवार के बंद भाव 249.95 रुपए से थोड़ा गिरकर 249.50 रुपए पर। लेकिन 10 बजे तक 4 फीसदी बढ़त लेकर 260 रुपए तक जा पहुंचा। असल में आज कंपनी के चौथी तिमाही के नतीजे आनेवाले हैं और उम्मीद है कि उसका ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 32 से 34 रुपए हो जाएगा। अभी 2008-09 के नतीजों के आधार पर कंपनी का ईपीएस 21.15 रुपएऔरऔर भी