ज़माना सपनों का
2011-10-30
आज का जमाना ही सपने देखने-दिखाने और उन्हें पूरा करने का जमाना है। अगर आप अपने सपने के लिए काम नहीं करते तो दूसरों के सपनों के लिए काम करते हैं। अपने या दूसरों के लिए? फैसला आपका है।और भीऔर भी
झूठ बोलने की सज़ा
2010-11-20
औरों से झूठ बोलते-बोलते हम एक दिन अपने से भी झूठ बोलने लगते हैं। वो दिन हमारे लिए सबसे ज्यादा दुखद होता है क्योंकि तब हमारा मूल वजूद ही हमारा साथ हमेशा-हमेशा के लिए छोड़कर चला जाता है।और भीऔर भी


