अक्टूबर 2007 में चार लाख रुपए से बनाई गई कंपनी फ्लिपकार्ट का मूल्यांकन दस साल बाद 2000 करोड़ डॉलर (करीब 1.35 लाख करोड़ रुपए) हो जाता है, वो भी तब उसका पिछले साल उसका घाटा 68% बढ़कर 8771 करोड़ रुपए हो गया था। यह है नए बिजनेस में छिपी संभावना और उसके मूल्यांकन का एक दृष्टांत। पर, कुछ पुराने बिजनेस हैं जिनका दम हमेशा बना रहता है। आज तथास्तु में सौ साल से ज्यादा पुरानी कंपनी…और भीऔर भी

सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार की कीमत सरकारी कंपनियों को चुकानी पड़ती है। वरना, ऐसा मानने की कोई वजह नहीं कि निजी कंपनियां प्रबंधन के लिहाज़ से बेहतर होती हैं। बल्कि, सरकारी कंपनियां ज्यादा प्रोफेशनल तरीके से चलाई जा सकती हैं। शिक्षा व स्वास्थ्य ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें सरकार को रहना ही चाहिए। कुछ और भी क्षेत्र हैं जहां सरकार की अहम भूमिका है और आगे भी बनी रहेगी। तथास्तु में आज ऐसे ही एक क्षेत्र की कंपनी…औरऔर भी

कंपनियां यूं ही अचानक नहीं डूब जातीं। उनके डूबने का एक अहम कारण है ऋण। कंपनी ऋण के भारी बोझ से दबी है और उसका परिचालन लाभ तय देय ब्याज के दो-तीन गुना से ज्यादा नहीं है तो वह डूब सकती है। इसलिए हमें कभी भी एक गुने से ज्यादा ऋण-इक्विटी अनुपात वाली कंपनी में निवेश नहीं करना चाहिए। साथ ही उसका धंधा अगले 15-20 सालों तक प्रासंगिक बने रहना चाहिए। अब तथास्तु में एक शानदार कंपनी…औरऔर भी

लंबे समय का निवेश भविष्य में फल देता है। पर भविष्य किसी ने नहीं देखा। मुमकिन है कि अभी टनाटन चल रही कंपनी चार-पांच साल बाद बैठ जाए और अपने साथ हमारा धन भी डुबा डाले। यही आशंका शेयर बाज़ार में निवेश का रिस्क है। एफडी में अमूमन मूलधन पर तय ब्याज मिलता रहेगा। लेकिन शेयर बाज़ार में पूरा का पूरा निवेश डूब सकता है। इसलिए इसमें इफरात धन ही लगाएं। अब तथास्तु में एक नई कंपनी…औरऔर भी

इंसान की तरह कंपनियों के भी जीवन में एक दौर बनने और जमने का होता है। इस दौरान उसे बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं। लेकिन इस दौर की समाप्ति के बाद जीवन एक ढर्रा पकड़ लेता है और बेरोकटोक आगे बढ़ता जाता है। जहां इंसान के जीवन का अंत निश्चित है, वहीं कंपनियों का जीवन अनंत है। अनिश्चितता हालांकि कभी खत्म नहीं होती। आज तथास्तु में बनने से लेकर जमने के दौर तक पहुंची एक कंपनी…औरऔर भी

देश में राजनीति की खींचतान और दुनिया में अमेरिका व चीन के बीच व्यापार युद्ध। शेयर बाज़ार में फिलहाल अनिश्चितता छाई है। मुमकिन है कि एक कदम आगे, दो कदम पीछे चलता बाज़ार अगले कुछ महीनों में काफी गिर जाए। लेकिन लंबे समय के निवेशकों को इस पर दुखी होने के बजाय खुश होना चाहिए क्योंकि ज़रूरत से ज्यादा चढ़े हुए अच्छी कंपनियों के शेयर सुरक्षित रेंज में आ जाएंगे। अब तथास्तु में एक और जानदार कंपनी…औरऔर भी

बीते वित्त वर्ष 2017-18 में बीएसई में लिस्ट कंपनियों का बाज़ार पूंजीकरण 20.7 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया। इस तरह निवेशकों की दौलत 17.03% बढ़ी है। वो भी तब, जब बाज़ार दो महीने पहले हासिल शीर्ष शिखर से नीचे आ चुका है। वहीं, सेंसेक्स पूरे वित्त वर्ष में 11.3% बढ़ा है, जबकि 29 जनवरी के शिखर तक इसकी बढ़त 22.5% थी। उसके बाद वह 9.5% नीचे आया है। अब तथास्तु में नए वित्त वर्ष की पहली कंपनी…औरऔर भी

निफ्टी इस साल 29 जनवरी के ऐतिहासिक शिखर 11,171.55 से 16 मार्च के सबसे निचले स्तर 9951.90 तक 10.92% गिर चुका है। उस दिन एनएसई में 312 कंपनियों ने 52 हफ्तों की तलहटी पकड़ ली। इनमें स्टेट बैंक, अंबुजा सीमेंट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, अडानी पावर, कैडिला, ल्यूपिन, पीएफसी, सीमेंस व टाटा मोटर्स जैसी कई नामी कंपनियां शामिल हैं। लेकिन 52 हफ्तों का न्यूनतम स्तर ही सुरक्षित निवेश का पैमाना नहीं है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी

एफडी में निवेश गेहूं-धान लगाकर सीजन-सीजन फसल काट लेने जैसा है। वहीं, शेयर बाज़ार में लिस्टेड संभावनामय कंपनियों में निवेश पेड़ लगाने जैसा है जिसका फायदा आपके बाद आपके परिजन भी उठा सकते हैं। इसलिए ज़रूर सोचें कि क्या आपने अपने समय में उभरती कंपनियों को देख-समझकर उनके मालिकाने का सीमित हिस्सा खरीदा या नहीं। याद रखें कि मौजूदा दौर में दौलत बनाने का सबसे उपयुक्त माध्यम अच्छी कंपनियां हैं। अब तथास्तु में एक और संभावनामय कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेश करनेवाले जानते हैं कि सेंसेक्स की चाल किसी टीवी चैनल के क्राइम शो से भी ज्यादा सनसनीखेज़ है। वह कुछ साल में 33,000 से 1,00,000 तक पहुंच सकता है और एकाध महीने में 25,000 तक भी लुढ़क सकता है। यही रिस्क है शेयर बाज़ार में निवेश करने का। लेकिन उठने और गिरने, दोनों ही सूरत में यहां निवेश के मौके कभी कम नहीं होते। आज तथास्तु में निवेश का ऐसा ही एक मौका…औरऔर भी