अंदर का निर्वात या रीतापन जितना बड़ा होता है, भगवान और सनसनीखेज़ चमकदार चीजों की माया हम पर उतनी ही हावी हो जाती है। बेहतर यही है कि रीतेपन को माया से नहीं, सच्चे ज्ञान से भरा जाए।और भीऔर भी

ज्ञान आनंद की पहली कड़ी है। ज्ञान की आंधी के बिना भ्रम नहीं टूटता, माया का जाल नहीं छंटता। जाल नहीं छंटता तो कुंडलिनी नहीं जगती, सहस्रार कमल नहीं खिलता, हम आनंद विभोर नहीं होते।और भीऔर भी

जब तक माया है, तभी तक भगवान है। माया के हटते ही भगवान भी उड़न-छू। तब हमें उस विराट सत्ता की अनुभूति होती है जो अंदर-बाहर हिलोर मार रही है और दुनिया का विराट छल भी तब बेपरदा हो जाता है।  और भीऔर भी

ये अहम, ये ईगो हमारे अंदर का ऐसा ब्लैक होल है जो हमारा सब कुछ सोख कर बैठा रहता है। भ्रमों के जंगल से, माया के जाल से हमें निकलने नहीं देता। निकलने की कोशिश करते ही खींचकर पुनर्मूषको भव कर देता है।और भीऔर भी

गुरु, किताब या ज्ञान के अन्य स्रोतों की भूमिका इतनी भर है कि वे हमारे मन-मस्तिष्क पर पड़े माया के परदे को हटा देते हैं। इसके बाद वास्तविक सच तक पहुंचने का संघर्ष हमें अकेले अपने दम पर करना पड़ता है।और भीऔर भी