कुछ लोग फाइनेंस को जमकर गरियाते हैं। कहते हैं कि यह तो बैठे-ठाले दूसरों की जेब ढीली करने का धंधा है, जबकि है यह उद्यमियों की प्रतिभा व मेहनत से हासिल कमाई में हिस्सेदारी का ज़रिया। शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग भी खुद को खोजने जैसी यात्रा है। जोखिम से नहीं डरते; कूदकर फलों को लपकने में मज़ा आता है; अध्ययन, अनुशासन व मेहनत का मन है तो कामयाब होंगे। कल की हिट टिप्स के बाद बात आजऔरऔर भी

लोकतंत्र में कोई भी नीति संबंधी मानक आमजन के लिए अप्रासंगिक नहीं होना चाहिए। अगर वो अप्रसांगिक है तो तय मानिए कि उस लोकतंत्र से लोगों को सायास बाहर रखा गया है। मुद्रास्फीति के कल आए आंकड़े ने यही साबित किया है। सरकार, वित्त मंत्री, उसके संत्री तक चहक रहे हैं कि मार्च में मुद्रास्फीति घटकर 6% से नीचे आ गई है। हम-आप पूछ रहे हैं कि अच्छा! घट गई? कब कैसे? शेयर बाज़ार ने ऐसा नहींऔरऔर भी

जबरदस्त शोर है। अखबारों में, नेट पर, चैनलों पर, समूचे मीडिया में। राजनीति में, समाज में। यहां तक कि मन में। इस शोर के बीच सच को पकड़ना है। जैसे, भारत-यूरोप व्यापार वार्ता में यूरोप चाहता है कि भारत वाइन व कारों का आयात सस्ता कर दे। भारत चाहता है कि यूरोप भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए रास्ता सुगम कर दे। हम भोग में डूबें और अपनी प्रतिभाएं उन्हें दे दें! ये कैसा व्यापार!! देखते हैं आज काऔरऔर भी

कामयाबी के लिए हर क्षेत्र के कुछ नियम-धर्म हैं। शेयर बाज़ार का नियम यह है कि यहां जितना भी धन लगाना हो, उसका 50-60% लार्ज, 25-30% मिड और 5-10% स्मॉल कैप कंपनियों में लगाना चाहिए। स्मॉल व मिड कैप कंपनियों के शेयर बढ़ते बड़ी तेज़ी से हैं तो लालच उनकी तरफ धकेलता है। लेकिन उनके गिरने का खतरा भी ज्यादा है तो सुरक्षित निवेश का नियम निकाला गया। इस बार एक लार्ज कैप कंपनी में निवेश कीऔरऔर भी

हम हिंदुस्तानी फालतू माथा फोड़ते हैं कि ग्रह-नक्षत्रों की चाल हमारे जीवन को कैसे चलाती है। लेकिन इस पर कम दिमाग लगाते हैं कि खुद हम इंसानों का सामूहिक बर्ताव क्या और कैसे गुल खिलाता है। शेयर बाजार में खरीदने व बेचनेवालों के सामूहिक मन को कैप्चर करता है परिष्कृत सॉफ्टवेयरों की मदद से टेक्निकल एनालिसिस। पर वो बस दशा बताता है, दिशा नहीं देता। दिशा जानने के सूत्र भिन्न हैं। बताएंगे बाद में। अभी हाल बाज़ारऔरऔर भी

हाल ही में टीआईएफआर के एक प्रोफेसर से मुलाकात हुई जो केवल निफ्टी फ्यूचर्स में ट्रेड करते हैं। मैंने उनसे पूछा कि निफ्टी फ्यूचर्स के भाव स्पॉट से अलग क्यों होते हैं? उन्होंने बता दिया। मेरा अगला सवाल कि कायदन सेटलमेंट के दिन स्पॉट में निफ्टी का बंद भाव फ्यूचर्स के भाव के बराबर होना चाहिए। पर ऐसा होता नहीं। क्यों? उनके पास जवाब नहीं था। मैं भी पता कर रहा हूं। अब आज के बाज़ार कीऔरऔर भी

फाइनेंस की दुनिया में ठगों की भरमार है। ‘कौआ कान ले गया’ का शोर है और सभी यकीन किए जा रहे हैं। एनालिस्ट कह रहे हैं कि निवेशकों को जल्दी चुनाव होने को डर सता रहा है तो सभी बेच रहे हैं। कोई खरीदनेवाला नहीं। इसलिए बाज़ार बेतहाशा गिर रहा है। आगे तो कत्लोगारद होगा। निफ्टी 5400 पर पहुंचेगा। वहीं क्रेडिट सुइस मानती है कि सेंसेक्स जल्दी ही 20,000 तक पहुंच जाएगा। ऐसे में कैसे पहुंचे सचऔरऔर भी

खबरों के आधार पर ट्रेडिंग कभी न करें क्योंकि अगर आपको खबर कंपनी के अंदरूनी सूत्रों से मिली है तो आप और आपके सूत्र को कभी भी इनसाइडर ट्रेडिंग के अपराध में भारी जुर्माना और जेल की सज़ा झेलनी पड़ सकती है। अगर खबर बाहर से मिली है तो 99.99% तय मानिए कि वो अफवाह है। अगर ऐसा न भी हो तो आप तक पहुंचते-पहुंचते शेयरों पर उसका असर हो चुका होता है। अब आज की खासऔरऔर भी

दिल्ली में मेरे एक पुराने परिचित हैं। यूं तो हम लोग एक ही कमरे में कई साल तक रहे हैं। लेकिन उन्हें मित्र कहना मैं मुनासिब नहीं समझता। उनका दावा है कि उनको देर रात कोलकाता से एफआईआई व म्यूचुअल फंडों की खरीद की खबर मिल जाती है। यही तरीका है शेयरों की चाल को समझने का। बाकी सब फालतू है। मेरा मानना है कि एफआईआई या डीआईआई के पीछे भागना फालतू है। अब लंबे निवेश कीऔरऔर भी

ठीक आज की तारीख को साल भर पहले इसी कॉलम में हमने नैटको फार्मा में निवेश की सलाह दी थी। तब उसका शेयर 340 रुपए चल रहा था। इसके बाद 20 दिसंबर 2012 को वो 505 रुपए तक चला गया और अभी 430 रुपए चल रहा है। इतना नीचे आने के बाद भी 26.47 फीसदी का रिटर्न। यह है शेयर बाज़ार में अच्छी कंपनियों में निवेश का फायदा। इसे कहते हैं कंपनी के बढ़ने के साथ निवेशऔरऔर भी