अरंडी बड़े ही जीवट वाला ऐसा पौधा है जो देश में उत्तर से दक्षिण तक कहीं भी आपको सड़क किनारे उगा हुआ मिल जाएगा। गुजरात, राजस्थान व आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में जमकर इसकी व्यावसायिक खेती होती है। भारत दुनिया में अरंडी व इससे बने उत्पादों का सबसे बड़ा उत्पादक है। दुनिया के बाजार का 65 फीसदी हिस्सा इसके पास है। अरंडी की खली से लेकर तेल तक में औषधीय गुण होते हैं। हिंदी भाषी इलाकों केऔरऔर भी

कोई समझे या न समझे। हमारा तो यही अंदाज़ है। जयश्री टी में हमने जो लक्ष्य 30 दिन में हासिल करने की बात कही थी, उसे तीन ट्रेडिंग सत्रों में ही हासिल कर लिया। हमने इसके 99 रुपए पर पहुंचने की बात कही थी। कल यह 99.40 रुपए तक चला गया। हमारा काम है पूरी ईमानदारी से निवेश की सलाह देना और वह काम हम किए जा रहे हैं। हां, बुद्धि और विश्लेषण की सीमा है तोऔरऔर भी

महात्मा गांधी ने पूंजीपतियों को जनता के धन का ट्रस्टी होने की बात कही थी। मार्क्स-एंगेल्स ने भी पूंजी के स्वामित्व को व्यापक आधार देने की वकालत की थी। लिस्टेड कंपनियां शेयर बाजार के जरिए इसी स्वामित्व का विस्तार करती हैं। लेकिन एक तो हमारे लचर कानून, दूसरे कंपनी के मामलों में आम शेयरधारकों की निष्क्रियता के चलते भारतीय प्रवर्तक जनधन के ट्रस्टी के बजाय उसकी निजी लूटखसोट में व्यस्त हैं। इसे ठीक करने के लिए जरूरीऔरऔर भी

हमें अपने निवेश के प्रति बड़ा निर्मम होना चाहिए। लक्ष्य पूरा हुआ, खटाक से कमाकर निकल लिए। कोई स्टॉक खरीद मूल्य से 25 फीसदी नीचे चला गया तो बिना मोह पाले उसे नमस्कार बोल डाला। डिवीज़ लैब में निवेश की सलाह हमारे चक्री महाशय ने सबसे पहले 27 अप्रैल 2011 को दी थी। तब इसका दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर 715 रुपए पर था। तीन महीने में ही यह करीब 18 फीसदी बढ़कर 28 जुलाई 2011औरऔर भी

जयश्री टी एंड इंडस्ट्रीज़ के दिसंबर तिमाही के नतीजे बड़े खराब रहे हैं। चाय और चीनी के दोनों ही धंधों में उसका मुनाफा घटा है। चाय सेगमेंट से बिक्री साल भर पहले की समान तिमाही से मात्र 5.7 फीसदी बढ़कर 104.93 करोड़ से 110.91 करोड़ रुपए हुई, पर यहां से हुआ शुद्ध लाभ 22.6 करोड़ से घटकर 9.33 करोड़ रुपए पर आ गया। चीनी में कंपनी ने देरी से पेराई शुरू की तो इस सेगमेंट की बिक्रीऔरऔर भी

सारा खेल गणनाओं और सही समय पर सही सूचनाओं को पकड़ने का है। याद करें 24 जनवरी को हमने कहा था – जागरण में 10% बस 10-15 दिन में। उसके एक दिन पहले 23 जनवरी को जागरण प्रकाशन का शेयर बीएसई में 98.15 रुपए पर बंद हुआ था। हमने कहा था कि यह 110 रुपए को पार कर सकता है। कल, 7 फरवरी को हमारे लिखे को 14 दिन ही पूरे हुए और जागरण का शेयर 114.50औरऔर भी

पानी अपने बहने का रास्ता खुद ढूंढ लेता है। लेकिन उसके संचय के लिए सायास टंकी या तालाब बनवाना पड़ता है। उसी तरह पैसा बहाने के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन उसके संचय व सही नियोजन के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। रातोंरात धन बनता नहीं, उड़ता है। इसलिए कभी भी खटाखट नोट बनाने के चक्कर में न पड़ें। धैर्य रखें। शेयर बाजार में बराबर ट्रेड हो रही करीब 3000 कंपनियों में से कमऔरऔर भी

चीनी देश का इकलौता उद्योग है जहां बीस साल पहले उठी उदारीकरण की बयार अभी तक नहीं पहुंची है। कच्चे माल, गन्ने की कीमत सरकार तय करती है। केंद्र ही नहीं, राज्य सरकारों तक का इसमें दखल रहता है। फिर अंतिम उत्पाद, चीनी का एक हिस्सा लेवी के बतौर सरकार खुद तय की गई कीमत पर ले लेती है। सरकार के इतने अंकुश के बावजूद हालात दुरुस्त नहीं हैं और किसानों व चीनी मिलों में ठनी रहतीऔरऔर भी

केन्नामेटल इंडिया मूलतः विदेशी कंपनी है। औद्योगिक उत्पादन में इस्तेमाल होनेवाले एडवांस किस्म के टूल्स, टूल सिस्टम और इंजीनियरिंग कंपोनेंट बनाती है। मूल अमेरिकी कंपनी केन्नामेटल का गठन 1934 में हुआ था। साल 2002 में उसने मशीन टूल्स के धंधे में लगे बहुराष्ट्रीय समूह विडिया को खरीद लिया तो उसकी भारतीय इकाई उसकी हो गई और उसने केन्नामेटल इंडिया का नाम अपना लिया। इसके जरिए अमेरिकी कंपनी का इरादा भारत व चीन के उभरते बाजारों को पकड़नेऔरऔर भी

रेप्रो इंडिया प्रिंटिंग व पब्लिशिंग के काम में लगी स्मॉल कैप कंपनी है। करीब तीन दशक से धंधे में है। खासतौर पर शिक्षा से संबंधित किताबें छापती है, भौतिक व डिजिटल दोनों स्वरूप में। कामकाज मुंबई से करती है। दो संयंत्र नवी मुंबई और सूरत के सचिन एसईज़ेड में हैं। धंधा देश ही नहीं, विदेश तक फैला है। करीब 60 फीसदी बिक्री विदेश से आती है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गठित निर्यात प्रोत्साहन परिषद कैपेक्सिल की तरफ सेऔरऔर भी