यह डर और अंधकार का दौर है। यहां बिंदास वही रह सकता है जो सारा कुछ नहीं तो बहुत कुछ जानता है या भयंकर मूर्ख है। जब हर तरफ बीमारी, असहिष्णुता, भ्रष्टाचार, हिंसा और अन्याय का बोलबाला है तो कोई सहज जीवन कैसे जी सकता है? हर ऊपरी परत निचली परत को अंधेरे में रखती है। सुखद यह है कि लोग अब अज्ञान की इस चादर को चिंदी-चिंदी करने लगे हैं। खैर! बनाते हैं आज की ट्रेडिंगऔरऔर भी

ज्ञान और प्रकाश के माहौल में ही लक्ष्मी बढ़ती हैं, फलती फूलती हैं। अज्ञान और अंधकार के बीच वे नष्ट हो जाती हैं। दीपावली पर जलाए जानेवाले दीप प्रकाश और ज्ञान के ही प्रतीक हैं। राम की वापसी तो बस कहानी है।और भीऔर भी