राजनीति नहीं रही सेवा, बन गई धंधा

शेयर बाज़ार विशुद्ध धंधा है। वहां बुद्धि की तलवार लेकर भावनाओं से खेलना स्वाभाविक है। मगर, राजनीति पहले धंधा नहीं, सेवा हुआ करती थी। उसे अब भी ऐसा ही होना चाहिए। लेकिन आज का कड़वा सच है कि धर्म की तरह राजनीति भी सबसे कम समय में सबसे ज्यादा कमाने का धंधा बन गई है। इसमें सच नहीं, महज झांकी पेश की जाती है। विज्ञापनों के शोर में सच गायब हो जाता है। अब मंगलवार की दृष्टि…

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