सरकार विकास कर नहीं रही। विकास का झांसा दे रही है। सरकारी अर्थशास्त्री आपको समझाएंगे कि छोटे किसानों के लिए बजट में भारत-विस्तार की नई योजना है, जिसमें विस्तार का मतलब है वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम टू एक्सेस एग्रीकल्चरल रिसोर्सेज़, ऐसा बहुभाषी एआई टूल जो हमारी कृषि का उद्धार कर देगा। दलाल पत्रकार और भांट भी बताएंगे कि विकसित भारत@2047 नारा नहीं, सचमुच का रोडमैप है। इनके तिलिस्म को तोड़ने के लिए आज हमें इस तंत्र का हिसाब करना होगा। बताना होगा कि किसी किराना दुकान का शटर गिर जाना देश के आधुनिक हो जाने का लक्षण नहीं, बल्कि बरबादी की आहट है। अमेजॉन, फ्लिपकार्ट या कोई कॉरपोरेट चेन भारत के विकास को मुक्त नही, दोहन करने के लिए आती है। बेरोज़गारी की समस्या नारों से हल नहीं की जा सकती। हैशटैग चलाकर अर्थव्यवस्था में कोई मांग नहीं पैदा की जा सकती। भारत से भाग रहे देशी-विदेशी निवेशकों को बड़े-बड़े चार्ट और पावर-प्वॉइंट प्रजेंटेशन से नहीं रोका जा सकता। देश को फॉर्मल बनाने के नाम पर छोटे-छोटे उद्योग-धंधों को बंद होने से रोकना होगा। नीतियों में पारदर्शिता लानी होगी। लोकतंत्र को मजबूत करना होगा। सरकार के प्रति विश्वास या इकबाल को बहाल करना होगा। ऐसी व्यवस्था करनी होगी, जिसमें किसी डेटा पर कोई सवाल न उठे। अब शुक्रवार का अभ्यास…
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