कमाई नहीं, इफरात बचत जाती है जोखिम में

दस रुपए कहीं गिरे हुए मिल जाएं तो जितनी खुशी मिलती है, उससे कहीं ज्यादा गम हमें ऑटो या दुकानवाले के एक रुपए ज्यादा लेने पर होता है। यह सामान्य मनोविज्ञान है। लेकिन शेयर बाज़ार में निवेश करते समय मानकर चलना होता है कि वो सारा धन डूब गया। बाज़ार में वही धन लगाएं जो आपकी अभी और बाद, यहां तक कि आकस्मिक ज़रूरतों का इंतज़ाम कर लेने के बाद बचता है। नहीं बचता तो पहले रोज़ी-रोज़गार बढ़ाने का प्रबंध कीजिए। याद रखें, शेयर बाज़ार हमारे-आपके लिए कमाई नहीं, बल्कि इफरात बचत से दौलत बनाने का बेहद जोखिम भरा उपक्रम है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…

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