मोदी सरकार जीडीपी को चमकाने के लिए सालों-साल से बड़े योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। जीडीपी की गणना का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 करना तय था। इसलिए उसने 2022-23 का जीडीपी जितना कम किया जा सकता था, उतना कम किया ताकि उसके आधार पर आगे अधिक वृद्धि दर दिखाई जा सके। वित्त वर्ष 2022-23 में नॉमिनल जीडीपी शुरू में ₹2,72,40,712 करोड़ आंका गया। फिर इसे घटाकर ₹2,68,90,473 करोड़ किया गया। फरवरी 2026 में आई नई सीरीज़ में इसे और घटाकर ₹2,61,17,627 करोड़ कर दिया। शुरुआती आकलन से पूरे ₹11,23,085 करोड़ या 4.12% कम। किसी को यह न लगे कि इसे केवल कम ही किया जा रहा है तो सरकार ने इसे ताज़ा अपडेट में ₹59,374 करोड़ बढ़ाकर ₹2,61,77,001 करोड़ कर दिया। 2022-23 को आधार वर्ष बना लिए जाने के बाद अब वही तब के जीडीपी का नॉमिनल और रीयल, दोनों स्तर बन गया है। सरकार ने पुरानी और नई सीरीज़ का चक्कर चलाकर ऐसी ही घटतौली 2024-25 के जीडीपी के साथ भी की है। पुरानी सीरीज़ में इसका अनंतिम डेटा ₹3,30,68,145 करोड़ था। इसे फरवरी 2026 में नई सीरीज़ के तहत ₹3,18,07,309 करोड़ बताया गया। ताज़ा अपडेट में और घटाकर ₹3,17,98,524 करोड़ कर दिया गया। शुरू से अंत तक पूरे ₹12,69,621 करोड़ यानी 3.84% की कमी। यह है नए को चढ़ाने के लिए पुराने को घटाने का मोदियापा। अब बुधवार की बुद्धि…
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