विचार जब तक धारा का हिस्सा हैं, तब आप उनमें गोता लगाकर आगे से आगे बढ़ते चले जाते हैं। लेकिन विचारधारा में बंधते ही आपका बढ़ना रुक जाता है और यथार्थ आपकी मुठ्ठी से फिसलने लगता है।
2011-08-07
विचार जब तक धारा का हिस्सा हैं, तब आप उनमें गोता लगाकर आगे से आगे बढ़ते चले जाते हैं। लेकिन विचारधारा में बंधते ही आपका बढ़ना रुक जाता है और यथार्थ आपकी मुठ्ठी से फिसलने लगता है।
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