अमेरिका में बांड खरीद घटी तो रुपया कांपेगा

अमेरिका का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व अगर नवंबर-मध्य से बांड खरीदने की रफ्तार धीमी कर देता है तो इसका क्या असर पड़ेगा? इससे पहले उसने मई 2013 में जब बांड खरीद घटाने या टैपरिंग की घोषणा की थी तो बाज़ार में अचानक ब्याज दरें बढ़ने लगीं। सरकारी बांडों पर यील्ड की दर बढ़ गई। उसने जब टैपरिंग की पूरी योजना पेश की, तब तो बांड के मूल्य इतना घट गए कि उनकी यील्ड काफी बढ़ गई। अमेरिकी निवेशक भारत, ब्राज़ील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका व तुर्की जैसे उभरते देशों से निकलने लगे। एफआईआई के निकलने से हमारा रुपया 22 मई से 30 अगस्त 2013 के बीच 15% खोखला हो गया। अब शुक्रवार का अभ्यास…

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