कमाई खप जाए, बचत कहीं उड़ न जाए!

खास लोगों की बात अलग है। सांसद-विधायक एक बार में इतना कमा लेते हैं कि सात पुश्तों का इंतज़ाम। ऊपर से ताजिंदगी भरपूर पेंशन। सरकारी कर्मचारियों को बराबर महंगाई भत्ता। लेकिन हमारे-आप जैसे आम आदमी की कमाई कभी महंगाई के हिसाब से नहीं बढ़ती। बीस साल में देशी घी ₹150 से ₹600 किलो और 10 ग्राम सोना ₹6000 से ₹60,000 का हो गया। लेकिन हमारी कमाई भी क्या इसी रफ्तार से बढ़ी? जो खा-पी लिया, पहन-ओढ़ लिया, वो तो हमारे ऊपर खर्च हो गया। लेकिन जो हमने अपनी गाढ़ी कमाई से बचा लिया, उसका क्या? घर में रखा तो महंगाई उसका सत्व खींच लेती है। बैंक में रखा तो बैंक खुद उससे काफी ज्यादा कमाकर हमें बस इतना देते हैं कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी। केवल कॉरपोरेट क्षेत्र है जिसे महंगाई को पूरा सोखना ही नहीं होता, बल्कि साल-दर-साल मुनाफे को बढ़ाते जाना होता है। ऐसा न करे तो उसका वजूद ही मिट जाएगा। आम आदमी अगर इस कॉरपोरेट क्षेत्र की पीठ पर लद ले तो वह भी महंगाई को मात देकर अपनी बचत का मूल्य बढ़ाता रह सकता है। शेयर बाज़ार हमें यही मौका देता है। आज तथास्तु में ऐसी कंपनी जिसमें 12 साल पहले लगाया गया धन 44 गुना हो चुका है…

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