जिस पर वश, उसे संभालें, बाकी रिस्क!
शेयर बाज़ार को कितने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कारक किस हद तक प्रभावित कर रहे हैं, क्या इसे हम-आप तो छोडिए, कोई विशेषज्ञ भी सही-सही सटीक रूप से जान सकता है? आप कहेंगे कि भले ही विशेषज्ञ न जान सके, लेकिन आज लार्ज लैंग्वेज़ मॉडल (एलएलएम) पर काम कर रहे एआई टूल्स तो ज़रूर जानकर हमें बता सकते हैं। मगर, एआई टूल्स भी तो जो पहले से उपलब्ध है, उसे ही ताश के पत्तों की तरह शफल करकेऔरऔर भी
गरीबों के लिए ज्यादा चमके सोना-चांदी!
मध्यवर्ग खर्च चलाने के लिए बैंकों व एनबीएफसी से ऋण लिये जा रहा है। कॉरपोरेट क्षेत्र पूजी निवेश के बजाय कैश बचा रहा है और बैंकों से ऋण लेने से कतरा रहा है। लेकिन देश के उन 81.35 करोड़ गरीबों का क्या जो हर महीने सरकार से मिल रहे पांच किलो मुफ्त राशन पर निर्भर हैं? यह आश्चर्यजनक, किंतु सच है कि भारत के गरीब अमीरों की बनिस्बत ज्यादा धन सोने में लगाकर रखते हैं। सरकार केऔरऔर भी
आम लोग ऋण से दबे, कॉरपोरेट मुक्त!
रिजर्व बैंक का डेटा बताता है कि ‘हम भारत के लोगों’ की वित्तीय आस्तियां वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर ₹34.3 लाख करोड़ और देनदारियां ₹18.8 लाख करोड़ यानी, देनदारियां आस्तियों की 54.81% हो गईं। यह 1970-71 के बाद के 53 सालों का सर्वोच्च स्तर है। कोरोना से घिरे वर्ष 2021-22 तक में लोगों की देनदारियां आस्तियों की 34% थीं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोविड के बाद से ही लोगबाग बचा कम और उधारऔरऔर भी
घरों की बचत पांच दशक में सबसे कम!
सरकार कह सकती है कि वाह! जनता में कितनी खुशहाली है। लोगों के पास इतनी बचत है कि म्यूचुअल फंड एसआईपी में निवेश जून महीने में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। लगातार 15 महीनों से एसआईपी में आ रहा धन 20,000 करोड़ रुपए से ज्यादा है। लेकिन झाग हटाकर सतह के नीचे देखें तो जनता का संत्रास भी दिख जाता है। जून महीने में 77.8% एसआईपी बीच में ही रोक दिए गए। इस दौरान 48.1 लाख एसआईपीऔरऔर भी






