शक्तिकांत दास को मोदी सरकार ने 12 दिसंबर 2018 से जब से रिजर्व बैंक का गवर्नर बनाया है, तभी से उन्होंने केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता व स्वतंत्रता को दरकिनार कर सरकार का दास बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। यह पद संभालने के बाद से अब तक वे रिजर्व बैंक के खज़ाने से 7,10,835 करोड़ रुपए केंद्र सरकार के हवाले कर चुके हैं। इस बीच 2021 में उन्हें तीन साल का पहला एक्सटेंशन मिल गया। उनकाऔरऔर भी

चींटी तक बराबर बरसात के लिए बचाकर रखती है तो इंसानों की क्या बात! बचाना हमारी फितरत है। लेकिन हम किसी निर्जन जंगल में नहीं, बल्कि देश में रह रहे हैं, जिसमें हर सामाजिक लेन-देन के लिए मुद्रा है। मुद्रा है तो मुद्रास्फीति भी है जिस पर हमारा कोई वश नहीं। इसलिए चाहे-अनचाहे अपनी बचत को मुद्रास्फीति से बचाना हमारी ज़िम्मेदारी बन जाती है। ज्यादा झंझट नहीं पालना तो बैंक एफडी और सरकारी या रिजर्व बैंक केऔरऔर भी

एक समय था, जब चीन से लेकर एशिया के तमाम देशों ने निर्यात के दम पर शानदार आर्थिक विकास हासिल किया। लेकिन जिस तरह यूरोप से लेकर अमेरिका तक सभी विकसित देशों में अर्थव्यवस्था व खपत ठहरी हुई है, उसमें भारत के लिए निर्यात के बलबूते अर्थव्यवस्था को तेज़ गति से बढ़ाना संभव नहीं है। फिर भी घरेलू बाज़ार और खपत पर फोकस करने के बजाय मोदी सरकार और उसके शागिर्द अर्थशास्त्री निर्यात केंद्रित विकास का मंसूबाऔरऔर भी

झूठ और भ्रम के पांव नहीं होते। वो पल भर में उड़कर कहीं से कहीं पहुंच जाते हैं। लेकिन झूठ और भ्रम का स्रोत अगर देश की सरकार ही बन जाए तो उस देश का बेड़ा गरक होने लगता है। केंद्र सरकार का एक मंत्रालय है सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय। इसने देश के आर्थिक व औद्योगिक विकास का दो तरह का डेटा पेश किया है। एक है नेशनल एकाउंट्स स्टैटिसटिक्स (एनएएस) और दूसरा है एनुअल सर्वेऔरऔर भी

मोदी सरकार ने चीन के साथ घृणा व प्रेम का विचित्र रिश्ता बना रखा है। सैटेलाइट तस्वीरें बताती है कि चीन लद्दाख में भारतीय सीमा के भीतर अवैध निर्माण कर रहा है। खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सितंबर 2020 में राज्यसभा में बताया था कि चीन ने लद्दाख में भारत की 38,000 वर्ग किलोमीटर ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है। राजनीतिक रूप से चीन को भारत का नंबर-एक दुश्मन माना जाता है। लेकिन प्रधानमंत्री मोदीऔरऔर भी