देश की अर्थव्यवस्था हो, चुनाव हों या शेयर बाज़ार, सत्ता और धंधे के सूत्र ने इन सबको जोड़ रखा है। सत्ता की आहट से ये सभी हिल जाते हैं। कल 18वीं लोकसभा के अंतिम चरण का मतदान है। फिर शाम को एक्जिट-पोल और मंगलवार को अंतिम नतीजे। इससे पहले आज आखिरी ट्रेडिंग दिन है तो शेयर बाज़ार में सनसनी मची हुई है। अभी दो दिन पहले अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी एस एंड पी ग्लोबल ने दस साल बादऔरऔर भी

साल 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस को 206 और भाजपा को 116 सीटे मिली थीं। शनिवार, 16 मई को नतीजों की घोषणा के बाद सोमवार, 18 मई को शेयर बाजार खुला तो मनमोहन सरकार के दोबारा सत्ता में आने की खुशी में बल्लियों उछल गया। उस दिन निफ्टी 17.74% और सेंसेक्स 17.34% बढ़कर बंद हुआ। क्या इस बार मंगलवार, 4 जून को नतीजों की घोषणा के बाद मोदी सरकार तीसरी बार सत्ता में आई तो बाज़ारऔरऔर भी

देश में जब भी लोकसभा चुनाव होते हैं तो उनके नतीजों को लेकर शेयर बाज़ार की धुकधुकी बढ़ जाती है। पिछले चार चुनावों पर नज़र डालें तो इस दौरान बाज़ार में उतार-चढ़ाव का आना बड़ा स्वाभाविक है। इस बार 19 अप्रैल से 1 जून तक सात चरणों में मतदान हो रहा है। इस दौरान 18 अप्रैल से कल 28 मई तक निफ्टी 4.06% और सेंसेक्स 3.70% बढ़ा है। 4 जून को नतीजे घोषित तक अगले पांच दिनोंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार को न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बार-बार किए जा रहे 400 पार के दावे पर यकीन है और न ही गृहमंत्री अमित शाह की इस गणना पर कि भाजपा छह चरण में 300-310 सीटें जीत चुकी है, जबकि सातवे व अंतिम चरण में 57 सीटों पर वोटिंग अभी होनी है। बाज़ार में छाई अनिश्चितता 1 जून को अंतिम चरण के मतदान और शाम को एक्जिट पोल के नतीजों से साथ शायद खत्म या थोड़ीऔरऔर भी

सेंसेक्स व निफ्टी ऐतिहासिक शिखर पर। सीधा मतलब कि शेयर बाज़ार में लालच चरम पर है। लेकिन खास मतलब टेढ़ा है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले दिन से ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कैश सेगमेंट से 1 अप्रैल से 24 मई के बीच स्टॉक एक्सचेंज द्वारा जारी अनंतिम आंकडों के मुताबिक शुद्ध रूप से 70,152 करोड़ रुपए निकाले हैं। बीते हफ्ते उन्होंने 1165.54 करोड़ रुपए की जो शुद्ध खरीद की, वोऔरऔर भी