सरकार अपना बेहताशा खर्च पूरा करने के लिए आमजन से वसूली के साथ-साथ जमकर ऋण लेती रही है। पर,  कॉरपोरेट क्षेत्र को रियायत व प्रोत्साहन यह कहकर देती रही है कि इससे वो नया निवेश करने को प्रेरित होगा, जिससे रोज़गार के नए-नए अवसर पैदा होंगे। ज़मीनी हकीकत क्या है? सितंबर 2022 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रोत्साहनों की चर्चा के बाद निजी क्षेत्र की तुलना हनुमान से करते हुए कहा था – का चुप साधिऔरऔर भी

सरकार की कोशिश है कि खर्च करनेवाले व्यक्तियों से जीएसटी और एक्साइज़ व कस्टम ड्यूटी के साथ ही अधिकतम इनकम टैक्स वसूल लिया जाए, जबकि लाभ कमानेवाली कंपनियों को टैक्स में ज्यादा से ज्यादा छूट दी जाए। इसके ऊपर कॉरपोरेट क्षेत्र को मिल रही ऋण-माफी और पीएलआई जैसी स्कीमों में दी जा रही सब्सिडी अलग से। लाखों करोड़ रुपए के ऐसे ‘प्रोत्साहन’ से आखिर क्या सचमुच देश का कोई भला हो रहा है, क्षमता विस्तार और नएऔरऔर भी

इनकम टैक्स भले ही प्रत्यक्ष टैक्स हो। लेकिन इसे साल में ₹2.5 लाख से ज्यादा कमानेवाला हर देशवासी देता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हमारी प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2022-23 में ₹99,404 तक पहुंची थी और अब ताज़ा अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में ₹1,06,134 रह सकती है। इसके ढाई गुना से ज्यादा कमाकर इनकम टैक्स देने वालों की संख्या 7.78 करोड़ हो चुकी है, जिसमें से 7.65 करोड़ बाकायदा टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं।औरऔर भी

भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन हमारा शेयर बाज़ार महीना भर पहले हांगकांग को पीछे छोड़कर दुनिया का चौथा बड़ा शेयर बाजार बन गया। अब अमेरिका, चीन व जापान के शेयर बाज़ार ही हम से ऊपर हैं। तीन दिन पहले 7 मार्च को तो निफ्टी-50 और बीएसई सेंसेक्स नए ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गए। अब सभी को डर सताने लगा है कि यहां से बाज़ार कहीं खटाक से गिर गया तो? आखिर चीन काऔरऔर भी