पिछले 10-12 साल से देश में गुजरात के आदर्श मॉडल का हल्ला चल रहा है। लेकिन पिछले माह निकारागुआ के रास्ते अमेरिका भागने की जुगत में लगे 303 नौजवानों में से सबसे ज्यादा 65 युवा गुजरात के थे। इन्हीं में मेहसाणा के एक युवक का कहना था, “यहां तो केवल उन्हीं को सरकारी नौकरी मिलती है जो पैसा खिलाते हैं या जिनकी तगड़ी पहुंच है। प्राइवेट में कायदे का पैसा नहीं मिलता। इसलिए भारत में रहकर हमेशाऔरऔर भी

देश का नौजवान भाग रहा है। देश में काम नहीं तो विदेश का रुख कर रहा है। पिछले ही महीने भारत के 303 नौजवान निकारागुआ के रास्ते अमेरिका पहुंचने के फेर में फांस में धर लिए गए। भारत से संयुक्त अरब अमीरात, दुबई और फिर चार्टर्ड प्लेन से फ्रांस के वात्री एयरपोर्ट के पहुंचे तो वहां अधिकारियों को संदेह हुआ और बहुत फजीहत के बाद उन्हें लाकर मुंबई एयरपोर्ट पटक दिया गया। इस घटना पर भी वैसीऔरऔर भी

यह सरकार नॉमिनल और रीयल यानी, सतह पर जो दिख रहा है और जो असल में है, उस पर जमकर खेल रही है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में अनुमान था कि हमारा जीडीपी नॉमिनल स्तर या ऊपर-ऊपर 10.5% बढ़ेगा और 4% मुद्रास्फीति या डिफ्लेटर को घटाने के बाद जीडीपी की रीयल या असल विकास दर 6.5% रहेगी। अब हुआ यह है कि राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) ने पूरे वित्त वर्ष का जो पहला अग्रिम अनुमानऔरऔर भी

सरकारी योजनाओं के प्रचार में चुनाव का तड़का लग जाए तो रंग में भंग नही पड़ती, बल्कि रंग पर भंग और ज्यादा चढ़ जाती है। देश फिलहाल आगामी लोकसभा चुनावों के सुपर-मोड में जा चुका है। राम मंदिर के अक्षत घर-घर तक पहुंचा दिए गए हैं। 22 जनवरी को अयोध्या में राम की नई मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ जो गुबार उठेगा, वो सारे उत्तर भारत को छा लेगा। इसके नीचे धरातल पर दिन अखबारों में हेडलाइंसऔरऔर भी

सर्दी उतर रही है। लेकिन कोहासा व धुंधलका बढ़ता ही जा रहा है। कहीं कुछ साफ नहीं दिख रहा। जिन बैंकिंग व आईटी कंपनियों में उछाल की बदौलत सेंसेक्स और निफ्टी नए ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गए, इन सूचकाकों में शामिल कंपनियों की सालाना रिपोर्ट ही बताती है कि 83% यौन उत्पीड़न के मामले उन्हीं के खिलाफ हैं। क्या शेयर बाज़ार का निवेशक व ट्रेडर इतना संवेदनहीन है कि मुनाफे के चक्कर में ऐसे अनैतिक आचरण कोऔरऔर भी