बाज़ार बढ़ जाता है तो दराज़ में रखी विशेषज्ञों की व्याख्याएं बाहर निकलकर फड़फड़ाने लगती हैं। वे बताते हैं कि मुद्रास्फीति घट रही है, ब्याज दरें बढ़ाने का सिलसिला रुक चुका है, वैश्विक अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही है, देश में राजनीतिक स्थिरता है, यूक्रेन पर रूस का हमला खत्म हो सकता है, आदि-इत्यादि। बाज़ार अचानक गिर जाए तो दराज़ से विशेषज्ञों की व्याख्या का दूसरा सेट निकल आएगा। सब बकवास है। पारम्परिक ज्ञान कहता है किऔरऔर भी

निफ्टी-50 सूचकांक 20,000 पर पहुंचते-पहुंचते रह गया। हफ्ते-दो हफ्तें में वहां पहुंच सकता है। फिर दो-चार साल में 30,000 तक भी चला जाएगा। हमारी अर्थव्यवस्था अभी 3.32 लाख करोड़ या ट्रिलियन डॉलर की है। कुछ साल में 5 ट्रिलियन और फिर 10 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। कुछ साल में जर्मनी, जापान से आगे निकल तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह विकास की सहज स्वाभाविक गति है। उसीऔरऔर भी

आप शेयर बाज़ार में निवेश करने जाएं तो साफ गिन लें कि कितना धन डुबाने का जोखिम ले रहे हैं। मुमकिन है कि किसी कंपनी में आपने जितना धन लगाया, वह सारा का सारा डूब जाए। जब जेब और मन इसके लिए तैयार हो, तभी निवेश करें। नहीं तो बेहतर होगा कि सरकार के बॉन्ड, बैंकों की एफडी या पीपीएफ वगैरह में अपना धन पार्क कर दें, जहां कम से कम मूलधन तो सुरक्षित बना हुआ दिखेगा।औरऔर भी

शेयर बाज़ार समझदारों का खेल नहीं है। यह तो लालच और डर की भावनाओं में खिंचते व भागते धनवानों का खेल है। यह दरअसल नीलामी का बाज़ार का है जिसमें भविष्य की सोच कर दांव लगा दिया जाता है जो गलत भी पड़ सकता है और सौदा आगे जाकर गले की हड्डी बन सकता है। वहीं, रीयल एस्टेट बाज़ार समझदार व बुद्धिमान ग्राहक समझदार व बुद्धिमान ग्राहक के साथ सौदा करता है। इसलिए रीयल एस्टेट बाज़ार मेंऔरऔर भी