सात दिन पहले सरकार का आखिरी अनुमान आया कि वित्त वर्ष 2022-23 में देश का जीडीपी 160.06 लाख करोड़ रुपए रहा है जो पिछले वित्त वर्ष 2021-22 के जीडीपी 149.26 लाख करोड़ रुपए से 7.2% ज्यादा है। तालियां बजती रहीं कि यह तो 7% के पिछले अनुमान को भी पार कर गई। लेकिन इसे कृषि की 4% और सेवा क्षेत्र की 9% विकास दर के दम पर हासिल किया गया है। मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की विकास दर इसऔरऔर भी

अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर देश में गरीबी और बेरोज़गारी की सही स्थिति से बनती है। वर्तमान सरकार ने गरीबी का कोई आधिकारिक आंकड़ा 2014 में सत्ता में आने के बाद से जारी ही नहीं किया। वहीं, बेरोजगारी को मापने का यहां न तो अंतरराष्ट्रीय पैमाना है और न ही देश की हकीकत के अनुरूप। 140 करोड़ आबादी में से जिन 80-81 करोड़ गरीबों का सरकार हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज देती है, वे बेरोज़गार रहना गवाराऔरऔर भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान की एक जनसभा में दावा किया कि दुनिया के बड़े-बड़े विशेषज्ञ बोल रहे हैं कि भारत अति गरीबी को समाप्त करने के बहुत निकट है। वेदों की तरह शब्द को ही प्रमाण मान लिया जाए तो मोदी की बात सच मान ली जाएगी। लेकिन विश्व बैंक ने अक्टूबर 2022 में जारी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में सबसे ज्यादा लोग अति गरीबी में जी रहे हैं। 2019 में 13.70 करोड़ लोगऔरऔर भी

इतिहास गवाह है कि चाहे देश हो, समाज हो, अर्थव्यवस्था हो या बाज़ार, झूठ ज्यादा नहीं चलता और अंततः जीत सत्य की ही होती है। कारण यह है कि झूठ के आधार पर कोई विकास हो ही नहीं सकता। बाज़ार में झूठ चलाते रहा जाए तो वह किसी दिन भयंकर असंतुलन और संकट को जन्म दे देता है। साल 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट इसका सबसे ताज़ातरीन उदाहरण है जब अमेरिका के वित्तीय जगत में चलाए जाऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमा पाना यकीनन मुश्किल है। लेकिन ट्रेडिंग के लिए स्टॉक्स चुनना आसान है। आम रिटेल ट्रेडर के माफिक वही स्टॉक्स होते हैं जिनमें लॉन्ग टर्म, मीडियम टर्म व शॉर्ट टर्म रुख बढ़ने का है। कोई स्टॉक 52 हफ्ते के शिखर के करीब हो या वहां पहुंच गया हो, तब भी उसे ट्रेड के लिए चुन सकते हैं। लेकिन लम्बे निवेश में हमें मूल्यवान शेयर को कम से कम भाव पर पकड़ना होताऔरऔर भी