शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग का हुनर कोई पेट से सीखकर नहीं आता। इसे सीखना पड़ता है और इसे सीखा जा सकता है। दुनिया ऐसे उदाहरणों से भरी पड़ी है। अपने यहां भी हज़ारों लोग मिल जाएंगे जो शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग व निवेश से घर-परिवार ही नहीं चलाते, बल्कि इसकी कमाई की बदौलत ऐशो-आराम से रहते हैं। डी-मार्ट के मालिक राधाकृष्ण दामाणी ने अपना सारा शुरुआती साम्राज्य शेयर बाज़ार से ही खड़ा किया। राकेश झुनझुनवाला अपने पीछेऔरऔर भी

हर ट्रेडर की चाहत व कोशिश यही रहती है कि उसका हर दिन मुनाफे का रहे। लेकिन हकीकत में ऐसा कहां हो पाता है! हमारे तमाम प्रयासों के बावजूद बहुत-बहुत से कारक हमारे सोचे व चाहे लक्ष्य को पूरा नहीं होने देते। हम इन कारकों को तो नहीं बदल सकते। लेकिन खुद को बदल या पीछे ज़रूर खींच सकते हैं। जिस दिन आपका मूड खराब हो, घर में या बाहर किसी से झगड़ा किया हो, मन बहुतऔरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस लगता ही लगता है। इससे कोई नहीं बच सकता। अनुभवी ट्रेडर इसकी पूरी तस्दीक करेंगे। किसी दिन व हफ्ते में ज्यादा नुकसान होता है तो किसी दिन व हफ्ते में कम। अनुभवी व कुशल ट्रेडर की हरचंद कोशिश होती है इस घाटे को कम से कम करना। इसके लिए वह ऐसा सिस्टम बनाता है जो उसके टेम्परामेंट से मेल खाता है। ध्यान रखें कि आप जितना सहज होकर ट्रेड करेंगे, कामयाबीऔरऔर भी

क्या शेयर बाज़ार को मात दी जा सकती है? इस सवाल का जवाब हां और ना दोनों है। हम यकीनन ट्रेडिंग में बाज़ार को मात नहीं दे सकते क्योंकि उसमें एक की हार ही दूसरे की जीत होती है। ज़ीरोसम गेम, एक का नुकसान, दूसरे का फायदा। लेकिन लम्बे समय के निवेश में, जहां समय बड़ा कारक बन जाता है, जहां वर्तमान के गर्भ से भविष्य का जन्म होता है, वहां सूझबूझ से बाजार को मात दीऔरऔर भी