क्या हमारा शेयर बाज़ार सालों की तेज़ी के बाद अब मंदी की गिरफ्त में आ चुका है? डाउ सिद्धांत कहता है कि बाज़ार अपने शिखर से 20% गिर जाए तो मंदी का दौर आज जाता है। निफ्टी-50 सूचकांक का ऐतिहासिक शिखर 19 अक्टूबर 2021 को 18,604.45 का है, जबकि 52 हफ्तों का न्यूनतम स्तर 17 जून 2022 को दर्ज 15,183.40 का है। अभी यह सूचकांक 15,752.05 पर है, ऐतिहासिक शिखर से 15.33% नीचे। यह शिखर से 20%औरऔर भी

सही निवेश के लिए कंपनी और उनके बिजनेस को जानना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि साफ-साफ इस बात का भी आकलन होना चाहिए कि पांच-दस साल बाद कंपनी और उसका बिजनेस कहां तक पहुंच सकता है। यकीनन, सटीक रूप से भविष्य तो कोई नहीं जानता। लेकिन समझदार आकलन से हम भविष्य के रिस्क को कम कर लेते हैं। शेयर बाज़ार में निवेश या ट्रेडिंग रिस्क को संभालने का ही खेल है। हमें इस रिस्क को न्यूनतम करने काऔरऔर भी

कमज़ोर होते रुपए से ऐसी तमाम कंपनियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा जो कच्चा माल विदेश से आयात करती हैं या बाहर से अंतिम उत्पाद मंगाकर घरेलू बाज़ार में बेचती हैं। बाहर से कच्चा हीरा मंगाकर उसे तराशने व चमकाने के बाद निर्यात कर देनेवाली कंपनियों पर खास असर नहीं पड़ हा। लेकिन रसायन या दवाओं के अवयव आयात करनेवाली कंपनियों का धंधा मंदा पड़ता जा रहा है। यूपीएल जैसी मजबूत कंपनी का शेयर यूं ही नहींऔरऔर भी