इन दिनों इंट्रा-डे ट्रेडर खुश हैं क्योंकि वे लहरों की उछलकूद से अच्छा कमा सकते हैं। निफ्टी-50 अक्सर दिन भर में 50-100 नहीं, बल्कि 150-200 अंक से ज्यादा के दायरे में नीचे-ऊपर होता है। लेकिन कम पूंजी लेकर निफ्टी ऑप्शंस पर दांव लगानेवाले बड़े व्यथित हैं। मालूम हो कि ऑप्शंस साधारण बीमा की तरह हैं जिनकी मीयाद के दौरान आपने इस्तेमाल कर लिया तो ठीक, नहीं तो मीयाद खत्म होने पर उनका कोई मूल्य नहीं रह जाता।औरऔर भी

शेयर बाज़ार में इधर एक खास पैटर्न दिख रहा है। कुछ दिन गिरने के बाद अचानक एकाध दिन वो बढ़ जाता है। लेकिन उसके बाद फिर कई दिनों तक गिरता जाता है। एडवांस-डिक्लाइन अनुपात किसी दिन चढ़ जाता है। फिर कई दिन तक नीचे डूबता जाता है। इसकी खास वजह है कि शेयरों को चढ़ाने के लिए धन का जो सतत प्रवाह चाहिए, वह अभी तक सूखता गया और आगे भी सटोरिया खरीद के लिए ज़रूरी धनऔरऔर भी

डेरिवेटिव सौदों का सच यह है कि हमारा शेयर बाज़ार अक्टूबर 2021 में जब शिखर पर था, तब निफ्टी फ्यूचर्स की लॉन्ग पोजिशन को कोई जून माह तक रोलओवर करे तो बाज़ार 20% से भी ज्यादा गिर चुका है। हालत यह है कि निफ्टी के स्पॉट या कैश सेगमेंट के भाव से जुलाई का निफ्टी फ्यूचर्स मात्र 0.14%, अगस्त का निफ्टी फ्यूचर्स मात्र 0.34% और सितंबर का निफ्टी फ्यूचर्स मात्र 0.62% ऊपर या प्रीमियम पर है। यहऔरऔर भी

क्या सौ साल से ज्यादा पुराने शेयर बाज़ार के डाउ सिद्धांत को अब भी सही माना जा सकता है? यकीनन माना जा सकता है, लेकिन हू-ब-हू नहीं। 1704 में लाया गया न्यूटन का सिद्धांत इसलिए नहीं गलत हो जाता कि वह पांच सौ साल से ज्यादा पुराना है। लेकिन उसे आइंसटाइन से लेकर मैक्स प्लांक तक के सिद्धांत से मिलाकर लागू किया जाता है। डाउ सिद्धांत जब आया था, तब शेयर बाज़ार में सारे सौदे स्पॉट याऔरऔर भी