अनिश्चितता बाहर है, अंदर भी कम नहीं!
2022-03-10
बाज़ार को दो साल से चढ़ाए जा रहे देश के प्रोफेनशल निवेशक हों, संस्थाएं या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) हो, वे इधर जमकर मुनाफावसूली कर रह हैं तो यह एकदम स्वाभाविक है। जो भी ज्यादा कमा लेता है, उसे सब गंवा देने की चिंता सताती है। वो भी तब जब तरफ अनिश्चितता के घने बादल छाते जा रहे हों। बाहर ही नहीं, अब तो देश के भीतर भी पांच राज्यों के ताज़ा विधानसभा चुनावों ने अनिश्चितता बढ़ाऔरऔर भी

