एक बात हमें अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि न तो अपने यहां देखभाल करनेवाला समाज है और न ही सरकार। हर कोई स्वार्थ का पुतला है। सरकार भी चंद निहित स्वार्थों की सेवा में लगी है। सबका साथ, सबका विकास महज अवाम को झांसा देने का नारा है। सबका विश्वास भी चरका पढ़ाकर हासिल किया जाता है। हमें अपना हित खुद समझना और हासिल करना है। शेयर बाज़ार पर भी यह बात पूरी तरह लागू होतीऔरऔर भी