निफ्टी-50 गिरेगा भी तो 20% से ज्यादा नहीं!
अपना शेयर बाज़ार गिरते-गिरते संभल जा रहा है। हालाकि देर-सबेर उसका गिरना तय है। लेकिन अहम सवाल है कि गिरा तो कहां तक गिर सकता है? जानकार कहते हैं कि निफ्टी-50 अगर अपने शिखर से 20% गिर जाए यानी 15,000 से नीचे पहुंच जाए तो कोई अचम्भा नहीं करना चाहिए। दरअसल 20% गिरना बाज़ार के तेज़ी से मंदी के दौर में चले जाने की सर्वमान्य परिभाषा है। अभी तो नकारात्मक खबर भी सकारात्मक असर दिखा जाती है,औरऔर भी
एफआईआई का निकलते जाना अशुभ संकेत
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई या एफआईआई) ने नवंबर में भारतीय शेयर बाज़ार के कैश सेगमेंट से 39,912 करोड़ रुपए निकाले हैं। लेकिन न जाने किस आधार पर एनएसडीएल इस दौरान एफपीआई की शुद्ध बिकवाली का आंकड़ा मात्र 5945 करोड़ रुपए दिखा रहा है। हो सकता है, वह फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस सेगमेंट के आंकड़े भी मिला देता हो। लेकिन ऐसा करने पर गलत तस्वीर सामने आएगी क्योंकि ऑप्शंस का मूल्य दिए गए प्रीमियम के आधार पर नहीं, बल्किऔरऔर भी
ओमिक्रॉन से भी अलग वजहें बाज़ार तोड़ने की
जानकार बोलते हैं कि कोरोना के डेल्टा वैरिएंट के समय शेयर बाज़ार ज्यादा नहीं गिरा था। इस बार भी हो सकता है कि ओमिक्रॉन का ज़ोर का झटका धीरे से लगकर निकल जाए। लेकिन जिस तरह से अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की कगार पर हैं और मुद्रास्फीति दुनिया के तमाम देशों में गम्भीर समस्या बनती जा रही है, वैसे में शेयर बाज़ार इन वजहों से भी धराशाई हो सकता है। तब उभरते देशों से विदेशी निवेशकऔरऔर भी





