पोर्टफोलियो अब भी काहे सिसके जा रहा है!
भारतीय शेयर बाज़ार नए शिखर पर। सेंसेक्स 32.18 और निफ्टी 36.46 के रिकॉर्ड पी/ई पर पहुंच गए। मगर, आम निवेशक का पोर्टफोलियो अब भी रोये जा रहा है। इसकी बड़ी वजह है बाज़ार में खरीद का मौजूदा पैटर्न। साथ ही कुछ दोष हमारा भी है। हम घाटेवाले शेयरों को भी इस उम्मीद में सहेजे रहते हैं कि कभी तो उठेंगे। हालांकि, नियमतः 20-25% घाटा होते ही हमें उन्हें निकाल देना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
अनजान कंपनियों में कभी भी न करें ट्रेडिंग
विदेशी संस्थाओं से देशी संस्थाएं निपट लेती हैं। हाई नेटवर्थ या एचएनआई निवेशकों के पास अनुभव से निकली महारत है। प्रोफेशनल ट्रेडर बाज़ार के दांवपेंच के उस्ताद हैं। आखिर, रिटेल ट्रेडरों के लिए क्या रास्ता है? क्या उन्हें बड़ी कपनियां छोड़कर छोटी कंपनियों में ट्रेडिंग के मौके ढूंढने चाहिए? नहीं, क्योंकि बैलगाड़ी से रेल का मुकाबला नहीं किया जा सकता। उन कंपनियों में कभी ट्रेड न करे, जिनका नाम आपने नहीं सुना हो। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
एफआईआई बन गए हैं आज के हर्षद मेहता
माना जाता है कि किसी भी समय किसी स्टॉक का भाव हज़ारों/लाखों निवेशकों के फैसलों का सम्मिलित नतीज़ा होता है। वह एक तरीके से भीड़ के विवेक को दर्शाता है। इसी से ट्रेन्ड बनता है और ट्रेडर को हमेशा ट्रेन्ड के साथ, उसकी दिशा में चलना चाहिए। लेकिन सवाल उठता है कि क्या स्टॉक के भाव वाकई भीड़ तय कर रही है या मुठ्ठीभर एफआईआई जो आज के हर्षद मेहता बन गए हैं? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
हो गईं अच्छी कंपनियां आम पहुंच से बाहर!
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक जब इतनी भारी रकम हमारे शेयरों में लगाएंगे तो उनके भावों का आसमान छूना लाज़िमी है। बाहर से सस्ता धन लाकर उन्होंने अच्छी कंपनियों के शेयर आम भारतीयों की पहुंच से बाहर कर दिए हैं। बीते हफ्ते निफ्टी-50 सूचकांक 35.90 के पी/ई पर ट्रेड हो चुका है। अभी तक इस सूचकांक का औसत पी/ई 20 के आसपास रहता आया है। इस तरह हमारा बाज़ार हो गया औसत से 79.50% महंगा। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी







