मोदी सरकार गरीबों, किसानों व आमलोगों का भला करने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में वह अमीरों व कॉरपोरेट्स का ही भला कर रही है। मसलन, वितरित लाभांश पर पहले कंपनियों को सेस-सरचार्ज मिलाकर 20.56% टैक्स देना पड़ता था। लेकिन इस साल से उन्हें नहीं, बल्कि शेयरधारकों को लाभांश पर टैक्स देना पड़ेगा। सरकार ने कंपनियों के भले के लिए आम निवेशकों को दबाया, खुद भी घाटा उठाया। आज तथास्तु में जमकर लाभांश देनेवाली एक कंपनी…औरऔर भी