शेयर बाज़ार की ‘आसान, सरल व सुलभ’ राह पर चलते-चलते जब अचानक वास्तविक सच्चाई से हमारा वास्ता पड़ता है, तब पता चलता है कि बड़ी मशक्कत से जोड़ी गई बचत कैसे देखते ही देखते एक झटके में स्वाहा हो जाती है। दो-चार हज़ार भी डूब जाएं तो हम घबरा जाते हैं, भयंकर असुरक्षा छा जाती है। लेकिन संस्थाएं रोज़ाना करोड़ों दांव पर लगाती हैं। फिर भी बगैर किसी असुरक्षा के जमकर कमाती हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी