हमारे हॉर्मोन का पिछलग्गू है बाज़ार
2020-07-19
कहते हैं, शेयर बाज़ार को कोई पकड़ नहीं सकता। पर उसका स्वभाव तो वहां सक्रिय इंसानों की हरकत से ही बनता है। इंसान लालच व डर की भावना और इनसे जुड़े एड्रेनलीन और कोर्टिज़ोल हॉर्मोन का वशीभूत होकर बाज़ार में उतरता है। तुरत-फुरत में ये भावनाएं और हॉर्मोन इंसान का माथा घुमा देते हैं। लेकिन लंबे समय में उसका दिमाग ठिकाने आ जाता है। शेयर बाज़ार का भी यही बर्ताव है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी


