प्रतिस्पर्धा, निष्पक्षता, उद्यमशीलता, मांग, सप्लाई व न्याय जैसे मूल्य बाज़ार का अभिन्न हिस्सा माने जाते हैं। लेकिन बाज़ार के साथ सब निष्पक्ष ही नहीं होता। रिलायंस ने कोरोना काल की घनघोर निराशा के बीच भी बाज़ार से जिस तरह से 1.51 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा जुटा लिए हैं, वह कमाल की बात है। लेकिन यह कमाल हासिल करने में सेबी, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और वित्त मंत्री तक ने उसकी मदद की है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी