लॉकडाउन तो गया, स्लोडाउन जारी
2020-06-08
हिंदी के मशहूर जनकवि बाबा नागार्जुन की कविता हैं, “बहुत दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास। बहुत दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास। बहुत दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त, बहुत दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त। दाने आए घर के अंदर बहुत दिनों के बाद, धुआं उठा आंगन से ऊपर बहुत दिनों के बाद।” 75 दिन खिंचा लॉकडाउन बीतने पर ऐसा ही कुछ लगता है। अब सोमवार का व्योम…और भीऔर भी

