ब्रोकर संगठन बराबर मांग करते रहे कि शेयर बाज़ार में जिस तरह अफरातफरी मची है, निफ्टी हर दिन 400-500 अंक उठता-गिरता है, उसमें उसे कम से कम लॉक-डाउन की अवधि तक बंद कर देना चाहिए क्योंकि मौजूदा स्थिति न ट्रेडरों के लिए अच्छी है, न निवेशकों के लिए। लेकिन पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी इसके लिए तैयार नहीं हुई। कमाल है कि शेयर बाज़ार को आवश्यक सेवाओं का हिस्सा माना जा रहा है। अब मंगलवार का दृष्टि…औरऔर भी

मार्च का महीना शेयर बाज़ार में शॉर्ट-सेलिंग करनेवाले ट्रेडरों के लिए वैसे भी खतरनाक होता है। फिर इस बार तो कोरोना के कहर ने हालात को ज्यादा ही संगीन बना दिया है। ऊपर से दुनिया की शीर्ष रेटिंग एजेंसियों में से स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर का अनुमान घटाकर 3.5% और मूडीज़ ने मात्र 2.5% कर दिया है। ऐसी भयंकर निराशा में धन का प्रवाह सूखता जा रहा है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

पिछले 30 दिनों में निफ्टी 26.59% गिरा है, जबकि रिलायंस 24.60%, इनफोसिस 17.96%, एचडीएफसी 23.76%, लार्सन एंड टुब्रो 32.29% और एचडीएफसी बैंक 25.02% गिर चुका है। जाहिर है, ऐसी मजबूत कंपनियों के शेयर आंधी में ज़मीन पर टपके पक्के आम की तरह हैं जिन्हें उठा लेना एक-दो साल में फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इस वक्त बाज़ार में निवेश के अवसरों की कमी नहीं। ऐसे में आज तथास्तु में महज जानने के लिए एक कंपनी…औरऔर भी

बाज़ार गिर रहा हो तो शॉर्ट-सेलिंग उसे गिराती ही चली जाती है। गिरावट जब बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो मांग उठती है कि शॉर्ट-सेलिंग पर रोक लगा दी जाए। हफ्ते भर पहले सेबी ने कुछ स्टॉक फ्यूचर्स की पोजिशन लिमिट आधी कर दी, इंडेक्स डेरिवेटिव्स में शॉर्ट-सेलिंग की सीमा बांध दी और कुछ शेयरों पर मार्जिन दर बढ़ा दी। मकसद था बाज़ार की उथल-पुथल को रोकना। वैसे, इधर शॉर्ट-कवरिंग भी चली है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के गिरने पर लोग शॉर्ट-सेलिंग, खासकर ऑप्शंस ट्रेडिंग का रुख करते हैं। मगर, ऑप्शंस में अभी कमाने की कम और गंवाने की प्रायिकता बेहद ज्यादा है। दरअसल, डर व घबराहट का सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 24 मार्च को 86.6350 की चोटी पर पहुंच गया तो ऑप्शंस सौदा उल्टा पड़ने की आशंका इस समय चरम पर है। पहले इसका उच्चतम स्तर वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान 17 मार्च 2008 को 85.13 का था। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी