वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से नियमित कमाना है तो बिजनेस चैनल देखने की आदत छोड़नी पड़ेगी। किसी स्टॉक में ट्रेडिंग के लिए रिटेल ट्रेडर को जितनी जानकारी चाहिए, वह उसके भावों में जज्ब होती है। इनसाइडर या अंदरूनी सूचनाओं पर आधारित ट्रेडिंग को छोड़ दें तो संस्थाएं भी भावों और उसके पीछे के मनोविज्ञान को समझ ट्रेड करती है। हम भी इस मनोविज्ञान को समझ लें तो बाज़ार से बराबर कमा सकते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए बाहर की सलाहें तभी तक ज़रूरी होती हैं, जब तक आपका आत्मविश्वास नहीं बन जाता। उसी तरह जैसे बच्चों की साइकिल में सीखते समय पीछे के पहिए के अगल-बगल दो छोटे पहिए लगे होते हैं। आत्मविश्वास जमने के बाद किसी एक्सपर्ट की सलाह की दरकार नहीं होती। गांठ बांध लीजिए कि अचूक सलाह देने का दावा करनेवाले दरअसल सलाह बेचने का धंधा कर रहे हैं, आपको फायदा पहुंचाने का नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जो जिंदगी सिखा देती है, वो किताबें कभी नहीं सिखा सकतीं। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग पर दुनिया के कितने भी सफल ट्रेडरों की किताब पढ़ लीजिए, टेक्निकल एनासिसिस का महंगे से महंगा कोर्स कर लीजिए, फिबोनाची नंबरों का सारा गणित सोख लीजिए, लेकिन बाज़ार से नियमित कमाई का कौशल आपको अपने अनुभव से ही सीखना होता है। फिर एक बार सीख लिया तो वह साइकल या कार चलाने जैसा आसान हो जाता है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

डर और चिंता की भावना का कोई तुक-तर्क नहीं होता। उन्होंने घेर लिया तो किसी दूसरे के समझाना कोई काम नहीं आता। सारा पढ़ा-लिखा भूल जाता है। तनाव चढ़ता ही चला जाता है। इससे मुक्ति के लिए हमें खुद डर व चिंता की भंवर से निकलना पड़ता है। यह आसान नहीं। लेकिन आसान काम यह है कि हम जब भी चिंताग्रस्त या डरग्रस्त हों तो वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से एकदम दूर रहें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था के आंकड़े जो निराशाजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं, वह नौकरीपेशा लोगों से लेकर काम-धंधे में लगे उद्यमियों तक में झलकने लगी है। कहीं से उजाले की किरण नहीं दिख रही। औद्योगिक उत्पादन व रोज़गार घटने के बाद अब मुद्रास्फीति भी बढ़ने लगी है। लेकिन इस निराशा के बीच याद रखें कि 1991 में तो इससे कहीं ज्यादा बदतर स्थिति थी। इसलिए निवेश के मौके अब भी हैं। आज तथास्तु में ऐसा ही एक मौका…और भीऔर भी