पूंजी, बुद्धि, सतर्कता, धैर्य और लचीलापन। यह वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से नियमित कमाई का बुनियादी आधार है। अहंकार-रहित होना भी ज़रूरी शर्त है। फिर भी अगर बाज़ार से सौ लोग कमाते हैं तो बहुत संभव है कि सबकी अपनी अलग शैली हो। असल में ट्रेडिंग में खटाखट फैसला लेना होता है तो इसमें हर किसी को वही स्टाइल पकड़नी चाहिए जो उसके व्यक्तित्व के माफिक पड़ती है। अन्यथा दूसरे उसे रौंद डालेंगे। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

बड़ा आसान लगता है शेयर बाजार या वित्तीय बाज़ार के किसी अन्य हिस्से से पैसा बनाना। लेकिन यह नौसिखिया लोगों का नहीं, उस्तादों का बाज़ार है। यहां वही उस्ताद बाज़ी जीतते हैं जिनके पास पूंजी, बुद्धि, धैर्य, सतर्कता और लचीलापन है। यहां वही लोग नियमित कमाई कर पाते हैं जो अपने झूठे गुरूर को खुद पैरों तले रौंदकर रखते हैं, जो गलती का आभास होते ही दांव से पीछे हट जाते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भीऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग ऐसा धंधा है जहां कुछ लोग कमाते और ज्यादातर लोग गंवाते हैं। हालांकि इधर स्थिति सुधरती जा रही है। लेकिन अब भी गंवानेवालों का अनुपात बहुत ज्यादा है। आठ-दस साल पहले तक हालत यह थी कि शेयर, कमोडिटी व फॉरेक्स बाज़ार में 95% गंवाते और केवल 5% कमाते थे। अब यह अनुपात थोड़ा सुधरकर 88% और 12% का हो गया है। लोग जितना जानते जाएंगे, गंवानेवाले उतना घटते जाएंगे। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग का नाम बहुतों ने सुना होगा। लेकिन उसे जानने व समझनेवालों की संख्या बहुत सीमित है। सबको लगता है कि यह गंगा की निर्मल धारा है जिसमें से जब चाहा, तब कुछ लोटा या बाल्टी पानी निकाल लिया। बात काफी हद तक सही है। लेकिन यह गंगा की धारा नहीं, यक्ष के उस तालाब की तरह है जहां प्रश्नों का उत्तर जाने बगैर आपको जीवन नहीं, मृत्यु मिलती है। अब मंगलवार की दृष्टि…और भीऔर भी

एक जमाना था, जब लोग अपनी धन-संपदा तिजोरियों में, ज़मीन के नीचे या दीवारों में छिपाकर रखते थे। लेकिन आज धन-संपदा बहती हुई धारा बन गई है। जिनमें हुनर है वे उस धारा में से जब चाहें, मनचाही मात्रा निकाल लेते हैं और जिनमें ऐसा हुनर नहीं है, वे अपनी टूटी किस्मत का रोना रोते रह जाते हैं। वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग बहती धारा से धन निकालने का ऐसा ही एक ज़रिया है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी