कहा जा सकता है कि शेयर बाज़ार पूरी अर्थव्यवस्था का नहीं, बल्कि कॉरपोरेट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है, वह भी केवल ढाई-तीन हज़ार लिस्टेड कंपनियो का। इसमें भी जिन शीर्ष सूचकांकों से हम बाज़ार की स्थिति मापते हैं, उनमें तो 30 से लेकर 50 कंपनियां ही शामिल हैं। इनके शेयर चढ़ रहे हैं तो शेयर बाज़ार चढ़ता दिखाई देता है, जबकि बाकी छोटी व मझोली कंपनियों के शेयर डूबते ही जा रहे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था के साथ-साथ हमारे कॉरपोरेट क्षेत्र की हालत भी खस्ता चल रही है। यह हकीकत रिजर्व बैंक की एक ताज़ा रिपोर्ट में स्वीकार की गई है। इस रिपोर्ट में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की 2696 कंपनियो का लेखा-जोखा लिया गया है। उसका कहना है कि इन कंपनियों का शुद्ध लाभ सितंबर 2019 की तिमाही में साल भर पहले से 54.3% कम रहा है। इसकी सीधी वजह उनके उत्पादों की मांग का काफी घट जाना है। अब सोमवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार चढ़ता ही जा रहा है, जबकि अर्थव्यवस्था डूब रही है। यह हमारे या आपके लिए ही नहीं, बल्कि देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यन तक के लिए दुरूह पहेली है। उन्होंने गुरुवार को आईआईएम अहमदाबाद में फाइनेंस, अर्थव्यवस्था व मार्केटिंग में बर्ताव संबंधी विज्ञान के एनएसई केंद्र के उद्घाटन करते हुए छात्रों से कहा कि यह पहेली सुलझा लो तो वे अमेरिका से उनके पास आ जाएंगे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अपना स्वभाव समझना, अपनी भावनाओं का तंत्र जानना और शेयर बाजार के काम करने के तरीके व उसके पीछे के मनविज्ञान को समझना। इसी में छिपा है यहां से कमाने का सूत्र। साथ ही टेक्निकल एनालिसिस के कैंडल के रूप, उसके स्थान के महत्व, कुछ मूविंग औसत व आरएसआई जैसे चुनिंदा संकेतकों की भाषा समझनी पड़ती है। यह रॉकेट साइंस जैसा कठिन काम नहीं, बल्कि आसान है। सब कुछ साधा जा सकता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी