अर्थनीति कभी सच को नज़रअंदाज़ नहीं करती। लेकिन हमारी मौजूदा राजनीति का हाल गजब है कि वह झूठ पर ही फल-फूल रही है। हकीकत स्वीकार लेने से उसकी तौहीन होती है। अन्यथा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा नहीं कह सकते थे कि पांच साल पहले देश की अर्थव्यवस्था तबाह हो रही थी जिसे उनकी सरकार ने संभाल लिया। वे स्वीकार करने को तैयार नहीं कि आज आर्थिक विकास की स्थिति बदतर हो चुकी है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी