जो एसबीआई पहले सरकार का पक्ष लेकर अभी तक अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी बताता रहा था, वह भी अब अपना टेम्पो नहीं बनाए रख पा रहा है। वह सबसे बड़ा बैंक और सरकारी ही नहीं, सरकार के सारे खाते संभालने वाला बैक भी है। जहां सब उम्मीद कर रहे थे कि पहली तिमाही में 5% तक डूबी विकास दर दूसरी तिमाही में 5.5% हो सकती है, वहीं एसबीआई का अनुमान 4.2% का है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

इस बार का त्योहारी सीज़न खराब रहा। आम उपभोक्ता से लेकर उनके लिए सामान बनानेवाली कंपनियों के लिए। फिर भी इसे तात्कालिक मामला मानकर छोड़ा जा सकता है। लेकिन जब देश मे डीजल से लेकर बिजली तक की मांग घट रही हो और आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हों तो यह गंभीर चिंता का मसला बन जाता है। शेयर बाज़ार भले ही ऊपर से बेफिक्र दिखे, लेकिन अंदर-अंदर उसकी भी हालत खराब है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार बड़ा ही दगाबाज़ है। पूरा सोच-समझकर रिसर्च के बाद आपने निवेश के लिए अच्छी कंपनियां चुनीं। लेकिन बाज़ार जब उनके शेयरों को दबा डालता है, तब आपको सारी समझ व सावधानी पर संदेह होने लगता है। आपको लगता है कि आपने भारी गलती कर दी। लेकिन जब बाजार आपके विश्वास को यूं तोड़ रहा हो, अक्सर वही वक्त पूरे विश्वास के साथ खड़े हो जाने का होता है। अब तथास्तु में आज की दमदार कंपनी…औरऔर भी

आर्थिक मोर्चे से बुरी खबरों का आना रुक नहीं रहा। औद्योगिक गतिविधियों की रीढ़ माना गया इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र भी अब अपना दुखड़ा रोने लगा है। देश के 262 ताप विद्युत संयंत्रों में 133 संयंत्रों को मांग न होने के कारण बंद करना पड़ा है। इससे पहले परिवहन में इस्तेमाल होनेवाले डीजल और सड़क निर्माण में इस्तेमाल होनेवाले बिटूमेन की मांग घटने की खबर आ चुकी है। इस बीच देश के सबसे बडे बैंक एसबीआई ने अपनी रिसर्चऔरऔर भी

अर्थव्यवस्था की हालत सुधर नहीं रही तो सभी निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तरफ भाग रहे हैं। उन्हें स्थापित व बड़ी कंपनियों में सुरक्षा दिखती है जो निफ्टी व सेंसेक्स में शामिल हैं। आम निवेशकों के धन से बने म्यूचुअल फंड भी मंहगे हो जाने के बावजूद इन्हीं में निवेश बढ़ा रहे हैं। पिछले 22 महीनों में उन्होंने बाज़ार में 1.78 लाख करोड़ रुपए डाले हैं, जबकि एफआईआई निवेश 37,381 करोड़ रुपए रहा है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी