जब भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर घनघोर निराशा की ही खबरें आ रही हों, तब दुनिया के सबसे अमीर शख्स बिल गेट्स ने कहा है कि अगर सरकार स्वास्थ्य व शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए ‘उत्साही तरीके’ से निवेश करे तो भारत अगले एक दशक में बहुत तेज़ी से आर्थिक विकास कर सकता है। अन्य जानकार भी यही मानते हैं कि बिना मानव पूंजी के देश आगे नहीं बढ़ सकता। फिलहाल तथास्तु में लीक से हटकर एक कंपनी…औरऔर भी

कहां तो अर्थव्यवस्था को हर साल कम से कम 8% की दर से बढ़ना था और कहां उसकी विकास दर 4-5% तक गिर गई। वह भी तब, जब जीडीपी की गणना का तरीका बदल दिया गया। राजनीति में लंबी जुबान या लफ्फाजी चल जाती है। लेकिन अर्थनीति में बड़बोलापन करोड़ों लोगों की ज़िंदगियां तबाह कर देता है। नोटबंदी ने जिन लाखों छोटे उद्योगों की कमर तोड़ी, वे आज तक नहीं उठ पाए हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2024 तक भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का दावा कर रखा है। ये उसी तरह का दावा है जैसे साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करने था। हकीकत यह है कि पिछले पांच सालों में किसानों की आय घटती जा रही है। लेकिन व्यापक अर्थव्यवस्था के साथ ऐसा होने का मतलब है भारत की सारी चमक का उड़ जाना और बेरोजगारी की महामारी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था की हालत की समग्र तस्वीर पेश करता है सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी। चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में साल भर पहले की समान अवधि की तुलना में यह 5% बढ़ा था जो 24 तिमाहियों की न्यूनतम विकास दर थी। लेकिन सितंबर तिमाही की विकास दर इससे भी बदतर होने का अंदेशा है। एसबीआई के 4.2% के बाद नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड इकनॉमिक रिसर्च का अनुमान 4.9% का है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी