हंगामे के बीच चलें सुरक्षा की राह
जब हर तरफ हंगामा मचा हो, भरोसा भरभराकर टूट रहा हो, तब परम्परा की सुरक्षित राह पकड़ने में ही समझदारी है। तब बहुत उछल-कूद मचाने के बजाय शांति से चलना उचित होता है और बड़ों के चक्कर में पड़ने के बजाय छोटों पर दांव लगाना कम रिस्की होता है। आज हम तथास्तु में ऐसी ही एक जमी-जमाई कंपनी पेश कर रहे हैं जो परम्परागत धंधे में लगी है और स्थाई भाव से बराबर बढ़ती जा रही है।औरऔर भी
गुर्राए तो शेर, काम तो भीगी बिल्ली
सरकार ध्यान भटकाने और लीपापोती में लगी है। लेकिन हकीकत यही है कि बम्पर बहुमत के बावजूद मोदी सरकार ने पहले बजट में जो ढीलापन दिखाया है, उससे उद्योग व निवेश जगत काफी निराश है। कहां तो उम्मीद थी कि वह बड़े स्तर के आर्थिक सुधार करेगी और कहां वह किसी चुनावी साल की तरह वोटरों को लुभाने की कसरत करती रही। इससे उनका जनादेश ही संदेह के घेरे में आ गया है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
ज़ोर का झटका लगने लगा है जोर से
इस बार जुलाई में शेयर बाज़ार का जो हाल रहा है, वह 17 सालों का सबसे बड़ा झटका है। सेंसेक्स जुलाई 2002 में 7.92% गिरा था। उसके बाद वह इस जुलाई में 4.86% गिरा है। यह पिछले साल अक्टूबर के बाद किसी भी महीने में आई सबसे तीखी गिरावट है। जुलाई में छोटी कंपनियों की हालत ज्यादा ही खराब रही। इस दौरान बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक क्रमशः 7.87% और 10.87% गिरे हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
मचा हाहाकार, विकास आएगा कहां से
ना उपभोक्ता की मांग और ना ही निजी निवेश। ऐसे में आर्थिक विकास आएगा कहां से! जुलाई में हमारे यहां कारों की बिक्री साल भर पहले की बनिस्बत 30.62% गिर गई। यह वाहन उद्योग के लिए दो दशकों का सबसे खराब जुलाई माह रहा। इस दौरान हमारी सबसे बड़ी यात्री वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुज़ुकी की बिक्री 36.71% घटी है। लगातार नौ महीनों से देश में यात्री वाहनों की बिक्री घट रही है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी







